छात्र ने खुद को गोली मारकर जान दी

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बीघापुर। सेना भर्ती की तैयारी कर रहे बीए के छात्र ने मंगलवार देर रात घर के बरामदे में कनपटी में तमंचा सटाकर खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजनों की नींद खुल गई। परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसकी मौत हो गई। पिता ने आत्महत्या की तहरीर दी पर कारण स्पष्ट नहीं कर सके।
सरांय गांव निवासी फतेह बहादुर यादव का बेटा सौरभ (18) बीए तृतीय वर्ष का छात्र था। सेना में भर्ती होने के लिए पिछले दो साल से तैयारी कर रहा था। मंगलवार रात परिवार के साथ खाना खाने के बाद छत पर सोने चला गया। रात लगभग 12 बजे वह छत से नीचे आया और बरामदे में तमंचा कनपटी में सटाकर खुद को गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर कमरों से निकले परिजन उसे लहूलुहान देख बेहाल हो गए। सांसें थमी देख परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना पर खेत से लौटे पिता सौरभ का शव देख फफक पड़े। थानाध्यक्ष राजबहादुर ने मौके पर पहुंचकर जांच की। फतेह बहादुर ने पुलिस को बताया कि सौरभ ने सेना में भर्ती होने का लक्ष्य बनाया था। रोजाना सुबह व शाम वह दौड़ लगाने जाता था। घटना की शाम वह अपने लिए दुकान से किसमिस, छोहारा समेत ढाई हजार रुपये का सामान लेकर आया था। उसने जान क्यों दी, इस बात से उन्होंने जानकारी नहीं है।
इधर, पोस्टमार्टम हाउस के डॉक्टरों ने गोली ढूंढने के लिए सौरभ का एक्सरे कराया पर सिर में गोली फंसी न मिलने से उसके आरपार निकल जाने की बात कही है। सौरभ तीन भाई बहनों में बड़ा था। उसकी मौत से छोटे भाई गौरव, बहन स्मिता व मां सरोज समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सौरभ की चाची सविता यादव गांव की प्रधान है। गांव में एक युवती से नजदीकी व विवाद के बाद आत्महत्या की चर्चा है।

यह भी पढ़ें -  Unnao News: आत्महत्या का प्रयास करने वाली किशोरी चौबीस घंटे से वेंटिलेटर पर

बीघापुर। सेना भर्ती की तैयारी कर रहे बीए के छात्र ने मंगलवार देर रात घर के बरामदे में कनपटी में तमंचा सटाकर खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजनों की नींद खुल गई। परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसकी मौत हो गई। पिता ने आत्महत्या की तहरीर दी पर कारण स्पष्ट नहीं कर सके।

सरांय गांव निवासी फतेह बहादुर यादव का बेटा सौरभ (18) बीए तृतीय वर्ष का छात्र था। सेना में भर्ती होने के लिए पिछले दो साल से तैयारी कर रहा था। मंगलवार रात परिवार के साथ खाना खाने के बाद छत पर सोने चला गया। रात लगभग 12 बजे वह छत से नीचे आया और बरामदे में तमंचा कनपटी में सटाकर खुद को गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर कमरों से निकले परिजन उसे लहूलुहान देख बेहाल हो गए। सांसें थमी देख परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना पर खेत से लौटे पिता सौरभ का शव देख फफक पड़े। थानाध्यक्ष राजबहादुर ने मौके पर पहुंचकर जांच की। फतेह बहादुर ने पुलिस को बताया कि सौरभ ने सेना में भर्ती होने का लक्ष्य बनाया था। रोजाना सुबह व शाम वह दौड़ लगाने जाता था। घटना की शाम वह अपने लिए दुकान से किसमिस, छोहारा समेत ढाई हजार रुपये का सामान लेकर आया था। उसने जान क्यों दी, इस बात से उन्होंने जानकारी नहीं है।

इधर, पोस्टमार्टम हाउस के डॉक्टरों ने गोली ढूंढने के लिए सौरभ का एक्सरे कराया पर सिर में गोली फंसी न मिलने से उसके आरपार निकल जाने की बात कही है। सौरभ तीन भाई बहनों में बड़ा था। उसकी मौत से छोटे भाई गौरव, बहन स्मिता व मां सरोज समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सौरभ की चाची सविता यादव गांव की प्रधान है। गांव में एक युवती से नजदीकी व विवाद के बाद आत्महत्या की चर्चा है।

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