प्रत्याशियों को नकार ‘नोटा’ दबाने में भी पीछे नहीं रहे वोटर

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उन्नाव। वोटर प्रत्याशियों को सिर माथे पर बैठाने के साथ ही उन्हें नकारने में भी ज्यादा समय नहीं लगाते हैं। पिछला चुनाव इसका बानगी है। विधानसभा चुनाव-2017 में ईवीएम मशीन में प्रत्याशियों के पार्टी सिंबल व उनके नाम के सामने वाली बटनों के अलावा नोटा बटन का भी खूब इस्तेमाल हुआ था। छह विधानसभाओं में पड़े कुल वोटों में एक प्रतिशत वोटरों ने सभी प्रत्याशियों को नकारते हुए नोटा (इनमें से कोई नहीं) बटन का भी इस्तेमाल किया था।
2017 विधानसभा चुनाव में कुल 1305590 वोट पड़े थे। इसमें करीब एक प्रतिशत वोटरों यानी 13220 को सभी विधानसभाओं में अपना भाग्य आजमा रहे 65 प्रत्याशियों में से कोई भी प्रत्याशी प्रभावित नहीं कर सका था। इन मतदाताओं ने ईवीएम मशीन में मौजूद नोटा बटन का इस्तेमाल करते हुए सभी को नकार दिया था। भाजपा, सपा,
कांग्रेस, बसपा, रालोद के अलावा अन्य पार्टियों व निर्दलीय प्रत्याशी मिलकर नोटा दबाने वाले इन वोटरों को प्रभावित नहीं कर सके थे। ऐसे में इन मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों द्वारा किए गए वादों को तवज्जो न देते हुए नोटा बटन का खुलकर इस्तेमाल किया था।
पिछले चुनाव में छह विधानसभाओं में सबसे अधिक भगवतंनगर में 2730 वोटराें ने नोटा बटन का इस्तेमाल किया। इसके बाद पुरवा में 2719 मतदाताओं ने प्रत्याशियों को नकार दिया था। वहीं मोहान में 2235 तो बांगरमऊ में 1,873 लोगों ने नोटा बटन इस्तेमाल किया था। इसके अलावा सदर में 1843 और सफीपुर में 1820 वोटरों ने नोटा बटन दबाई थी। राजनैतिक विश्लैषकों की मानें तो नोटा दबाने का मतलब वोटरों में पार्टी और उनके प्रत्याशियों के प्रति गुस्सा है। जिस कारण मतदाताओं ने पोलिंग बूथ जाकर उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा का चयन किया।

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उन्नाव। वोटर प्रत्याशियों को सिर माथे पर बैठाने के साथ ही उन्हें नकारने में भी ज्यादा समय नहीं लगाते हैं। पिछला चुनाव इसका बानगी है। विधानसभा चुनाव-2017 में ईवीएम मशीन में प्रत्याशियों के पार्टी सिंबल व उनके नाम के सामने वाली बटनों के अलावा नोटा बटन का भी खूब इस्तेमाल हुआ था। छह विधानसभाओं में पड़े कुल वोटों में एक प्रतिशत वोटरों ने सभी प्रत्याशियों को नकारते हुए नोटा (इनमें से कोई नहीं) बटन का भी इस्तेमाल किया था।

2017 विधानसभा चुनाव में कुल 1305590 वोट पड़े थे। इसमें करीब एक प्रतिशत वोटरों यानी 13220 को सभी विधानसभाओं में अपना भाग्य आजमा रहे 65 प्रत्याशियों में से कोई भी प्रत्याशी प्रभावित नहीं कर सका था। इन मतदाताओं ने ईवीएम मशीन में मौजूद नोटा बटन का इस्तेमाल करते हुए सभी को नकार दिया था। भाजपा, सपा,

कांग्रेस, बसपा, रालोद के अलावा अन्य पार्टियों व निर्दलीय प्रत्याशी मिलकर नोटा दबाने वाले इन वोटरों को प्रभावित नहीं कर सके थे। ऐसे में इन मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों द्वारा किए गए वादों को तवज्जो न देते हुए नोटा बटन का खुलकर इस्तेमाल किया था।

पिछले चुनाव में छह विधानसभाओं में सबसे अधिक भगवतंनगर में 2730 वोटराें ने नोटा बटन का इस्तेमाल किया। इसके बाद पुरवा में 2719 मतदाताओं ने प्रत्याशियों को नकार दिया था। वहीं मोहान में 2235 तो बांगरमऊ में 1,873 लोगों ने नोटा बटन इस्तेमाल किया था। इसके अलावा सदर में 1843 और सफीपुर में 1820 वोटरों ने नोटा बटन दबाई थी। राजनैतिक विश्लैषकों की मानें तो नोटा दबाने का मतलब वोटरों में पार्टी और उनके प्रत्याशियों के प्रति गुस्सा है। जिस कारण मतदाताओं ने पोलिंग बूथ जाकर उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा का चयन किया।

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