यूपी चुनाव 2022: सपा के M-Y पर भारी पड़ा भाजपा का M-Y, कांग्रेस का एमवाई समीकरण भी हुआ फेल 

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सार

इस बार यूपी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा 255 सीटों पर जीत हासिल की। समाजवादी पार्टी के खाते में 111 सीटें आईं। अपना दल (सोनेलाल) के 12, निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के छह-छह प्रत्याशी जीते। 
 

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यूपी चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब विपक्ष अपनी हार की समीक्षा में जुटा हुआ है। जिस तरह से कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी के आंकड़े सामने आए हैं, वो दोनों पार्टियों के लिए चिंताजनतक है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने पहले के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन फिर भी बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। 

हम आपको विपक्ष और सत्ता पक्ष के उस समीकरण के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी बदौलत राजनीतिक दलों ने यूपी में चुनाव लड़ा। वह समीकरण है एमवाई (M-Y) का। अब आप सोच रहे होंगे ये M-Y क्या है?  दरअसल इसका मतलब हर राजनीतिक दल के लिए अलग-अलग है। इस खबर में हम इसी की जानकारी देंगे। ये भी बताएंगे कि कैसे भाजपा का  M-Y सपा और कांग्रेस के एमवाई फैक्टर पर भारी पड़ गया? 
समाजवादी पार्टी : माना जाता है कि समाजवादी पार्टी को दो खास वर्ग के वोटर्स सबसे ज्यादा समर्थन मिलता है।  इसमें मुस्लिम और यादव (M-Y) शामिल हैं। 2012 में मुस्लिम-यादव के अलावा अन्य ओबीसी, ब्राह्मण वोटर्स का भी समाजवादी पार्टी को साथ मिल गया था। इसके चलते अखिलेश चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे। 2017 में फिर से इसकी कोशिश हुई, लेकिन इस बार वह ज्यादा सफल नहीं हुए। यहां तक की यादव और मुस्लिम वोटों में भी बंटवारा हो गया था। इस बार अखिलेश ने इस फैक्टर के साथ बाकी पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की। सपा को अपने परंपरागत वोट बैंक का साथ भी मिला, लेकिन अन्य जातियों ने ज्यादा भरोसा नहीं किया। इस कारण वह भाजपा के M-Y फैक्टर के आगे फेल हो गए। 

भारतीय जनता पार्टी : उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी (M-Y) के फैक्टर ने भाजपा को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचाया।  दोनों की सरकारों के कामों का भाजपा को फायदा मिला। मसलन मोदी की उज्जवला गैस योजना, पीएम आवास योजना, राशन योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बिना किसी व्यवधान का पहुंचा। इसी तरह योगी आदित्यनाथ ने केंद्र से मिल रहे राशन के अतिरिक्त प्रदेश सरकार की तरफ से भी गरीबों को मुफ्त राशन दिया। गरीब घर की बेटियों की शादी के लिए अनुदान दिया गया, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने जैसी योजनाएं लोगों के बीच काफी चर्चित हुईं। इसी के चलते अखिलेश यादव के मुस्लिम-यादव (M-Y) पर मोदी-योगी (M-Y) फैक्टर भारी पड़ गया। 

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कांग्रेस : महिला-यूथ (M-Y) : कांग्रेस का पूरा फोकस इस बार महिलाओं और युवाओं पर था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसके लिए पूरा जोर लगाया। कांग्रेस के विधान पत्र में महिलाओं और युवाओं से जुड़े कई वादे किए गए। यहां तक कि युवाओं के लिए नौकरी विधान  और महिलाओं के लिए शक्ति विधान के नाम से अलग घोषणा पत्र तक जारी किया गया। महिलाओं को चुनाव में 40% टिकट भी दिया। इसके बाद भी कांग्रेस तीन फीसदी वोट भी नहीं पा सकी। 

पार्टी   सीटें
भाजपा 255
समाजवादी पार्टी 111
अपना दल (सोनेलाल) 12
आरएलडी 08
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 06
निषाद पार्टी 06
कांग्रेस 02
जनसत्ता दल लोकतांत्रिक 02
बसपा 01

                             

विस्तार

यूपी चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब विपक्ष अपनी हार की समीक्षा में जुटा हुआ है। जिस तरह से कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी के आंकड़े सामने आए हैं, वो दोनों पार्टियों के लिए चिंताजनतक है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने पहले के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन फिर भी बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। 

हम आपको विपक्ष और सत्ता पक्ष के उस समीकरण के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी बदौलत राजनीतिक दलों ने यूपी में चुनाव लड़ा। वह समीकरण है एमवाई (M-Y) का। अब आप सोच रहे होंगे ये M-Y क्या है?  दरअसल इसका मतलब हर राजनीतिक दल के लिए अलग-अलग है। इस खबर में हम इसी की जानकारी देंगे। ये भी बताएंगे कि कैसे भाजपा का  M-Y सपा और कांग्रेस के एमवाई फैक्टर पर भारी पड़ गया? 

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