कफ सिरप की तस्करी मामले में अमेरिका की कंपनी को नोटिस

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लखनऊ : नशे के लिए प्रयोग किये जाने वाले फेंसेडिल कफ सिरप व कोडीन युक्त दवाओं का प्रदेश में करीब 300 करोड़ रुपये का भंडारण किया गया है। यह भंडराण तस्करों की मिलीभगत से कारोबारियों ने किया। इसका खुलासा सहारनपुर से गिरफ्तार चार आरोपियों की पूछताछ में हुआ है। इस मामले में एसटीएफ ने अमेरिका की कंपनी को नोटिस भी भेजा है। ताकि इसकी भारत में तस्करी पर रोक लगाई जा सके।

एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह ने बताया कि कफ सिरप और अन्य दवाओं के नशे में इस्तेमाल करने के लिए भंडारण किया जाता है। जांच में पाया गया कि यह कंपनी अमेरिका से जुड़ी हुई है। कुछ देशों में यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह सिरप भारत में जहां बिक रही है, इसका पता लगाया जा रहा है। साथ ही इसे पूरी तरह से रोकने के लिए अमेरिका की कंपनी से पत्राचार किया जा रहा है। जांच में सामने आया कि रांची का सुपर डिस्ट्रीब्यूटर शैली ट्रेडर्स भी फेंसेडिल की तस्करी में शामिल है। इन लोगों ने मिलकर 300 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है।

एएसपी लालप्रताप के मुताबिक बिहार, झारखंड, आसाम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में सप्लाई रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम का गठन किया था। टीम ने 8 अप्रैल 2024 को यूपी एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने सुशांत गोल्फ सिटी के अहिमामऊ से ट्रक चालक धर्मेंद्र कुमार निवासी मौरावां उन्नाव को गिरफ्तार किया था। ट्रक से 52 पेटी सिरप और अन्य सामान बरामद किया गया था। बरामद माल पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा था। एसटीएफ ने सहारनपुर में छापेमारी कर विभोर राणा, विशाल सिंह, बिट्टू कुमार और उसके भाई सचिन कुमार निवासी अनमोल विहार कालोनी सहारनपुर हालपता अब्दुल्ला नगर देवबंद को गिरफ्तार कर लिया।

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जांच में सामने आया कि आरोपी विभोर राणा व विशाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में अपनी फर्म जीआर ट्रेडिंग सहारनपुर के नाम पर एबाट कंपनी से सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप लिया। एबाट कंपनी की दवा फेंसेडिल कफ सिरप को बांग्लादेश में नशे के रूप में काफी प्रयोग किया जाता है, जिससे तस्करी करने वालों में काफी मांग रहती है। लालच में आरोपितों ने परिचितों के नाम पर ड्रग लाइसेंस बनवाकर और उस पर फर्जी फर्म बनाकर कागजों में ही फेंसेडिल की खरीद फरोख्त दिखाकर दवा को असली रिटेलर को न देकर नशे के लिए बांग्लादेश तस्करी करने वाले गिरोह को दे देते थे।

एएसपी के मुताबिक वर्ष 2021 में जौनपुर, वाराणसी और मालदा में कई जगह एसटीएफ और एनसीबी की कार्रवाई की। जांच में फर्म जीआर ट्रेडिंग और कर्मचारी बिट्टू कुमार के नाम पर बनी फर्जी फर्म सचिन मेडिकोस का नाम सामने आया। वर्ष 2022 में एनसीबी पश्चिम बंगाल ने विभोर राणा को गिरफ्तार भी किया गया था। जमानत मिलने के बाद जीआर ट्रेडिंग बंद कर अपने कर्मी सचिन कुमार के नाम पर ड्रग लाइसेंस बनवाया। फिर एबाट कंपनी के अधिकारियों से मिलकर मारुति मेडिकोज को हरिद्वार उत्तराखंड की सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप दिला दी। सचिन और बिट्टू कुमार को मुनाफे का लालच दिया। करीब 6 महीने तक काम करने के बाद अप्रैल 2024 में एसटीएफ ने लखनऊ में माल पकड़ लिया। उसके बाद सहयोगी अभिषेक शर्मा के नाम से दिल्ली में एबी फार्मास्यूटिकल्स फर्म बनाकर एबाट कंपनी के अधिकारी से सेटिंग कर सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप ली और दोबारा फेंसेडिल की तस्करी का काम करने लगे। एसटीएफ इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के साथ ही कंपनियों के कारोबार की पूरी जांच कर रही है।

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