लखनऊ : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ( केजीएमयू) प्रशासन ने शुक्रवार को वकील के माध्यम से परिसर में बनी मजारों पर नोटिस चस्पा करवा दिए। इसमें 15 दिन में स्वयं मजार हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद प्रशासन मजार हटाने की कार्रवाई करेगा और मजार में हटाने में आने वाला खर्च भी वसूल करेगा।
केजीएमयू परिसर में अवैध कब्जों और मजारों को हटाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले कमेटी गठित की गई थी। इसका नोडल अधिकारी डीन डॉ. केके सिंह को बनाया गया था। सर्वे के दौरान नेत्र रोग विभाग के बगल की जमीन को खाली कराने के साथ वहां बनी मजार को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन विरोध के चलते कार्रवाई रोक दी गई थी।
अब धर्मांतरण के प्रयास का मामला सामने पर मजारों का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। इसके बाद शुक्रवार को केजीएमयू प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर, रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग, क्वीनमेरी और नेत्र रोग विभाग के पीछे सहित परिसर के कई स्थानों पर बनी मजारों पर नोटिस चस्पा करा दिए। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि 15 दिन में देखरेख करने वाले स्वयं मजार हटा लें, ऐसा न करने पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएगी और मजार हटाने में आने वाला खर्च भी संबंधित लोगों से वसूला जाएगा।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि कुलपति के निर्देश पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी है। मजारों के आसपास अतिक्रमण है, जिसे हटाया जाएगा ताकि केजीएमयू के विस्तार को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों के चलते परिसर में पार्किंग की समस्या गंभीर हो गई है और आवागमन बाधित हो रहा है। तय समय में मजार नहीं हटाई गई तो प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करेगा।
मजार हटाने की प्रक्रिया को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस दोनों सतर्क हैं। किसी भी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण ढंग से की जाएगी, ताकि किसी भी समुदाय या वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।








