गली-गली नर्सिंग होम, रजिस्टर्ड सिर्फ 118

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उन्नाव। जिले में नर्सिंग होम की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर माह शहर की गलियों में नया नर्सिंग होम खुल रहा है। इनका आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया है लेकिन सरकारी रिकार्ड में सिर्फ 118 नर्सिंग होम ही दर्ज हैं। ऐसे में साफ है कि करीब 82 नर्सिंग होम बिना पंजीकरण चल रहे हैं और लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर लगाम नहीं लगा पा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 साल में शहर में 118 निजी अस्पताल खोले जा चुके हैं। जबकि जिले में इनकी कुल संख्या 200 के पार हो गई है। दर्ज नर्सिंग होम में शहर में सिर्फ 25 वहीं अलग-अलग ब्लॉकों व तहसील स्तर पर 93 अस्पताल संचालित हैं। अन्य नर्सिंग होम में अवैध तरीके से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिम्मेदार नवीनीकरण के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
ये हैं मानक
– हॉस्पिटल के मेन गेट पर पैनल डॉक्टरों की सूची लगी हो।
– सीज फायर की एनओसी होनी चाहिए।
– मेडिकल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का सर्टिफिकेट अनिवार्य।
– ओटी टेबल, ऑपरेशन के उपकरण होना जरूरी।
– मरीज भ्रमित न हों इसके लिए रेट लिस्ट चस्पा हो।
– मरीजों के लिए पर्याप्त बेड हों।
सात माह पूर्व चला था अभियान
करीब सात माह पहले नवाबगंज के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद डीएम के निर्देश पर अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इसमें शहर के कब्बाखेड़ा में दो नर्सिंगहोम को फर्जी तरीके से ट्रामा सेंटर लिखने और मानक के अनुसार उपकरण व स्टाफ न होने पर बंद कराया गया था। सिकंदरपुर सरोसी में बिना रजिस्ट्रेशन खुले नर्सिंग होम पर भी कार्रवाई की गई थी। सफीपुर और बांगरमऊ में बिना अनुमति संचालित दो क्लीनिकों पर प्रशासन ने ताला लगवाया था।
बिना पंजीकरण किसी भी निजी अस्पताल का संचालन नहीं होने देंगे। अस्पतालों का नवीनीकरण मई में पूरा हो जाएगा। इसमें जो नवीनीकरण नहीं कराएंगे, उन्हें पूरी तरह से बंद करा दिया जाएगा। – डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ

यह भी पढ़ें -  चकरोड पर कब्जे की शिकायत पर एसडीएम ने की जांच

उन्नाव। जिले में नर्सिंग होम की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर माह शहर की गलियों में नया नर्सिंग होम खुल रहा है। इनका आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया है लेकिन सरकारी रिकार्ड में सिर्फ 118 नर्सिंग होम ही दर्ज हैं। ऐसे में साफ है कि करीब 82 नर्सिंग होम बिना पंजीकरण चल रहे हैं और लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इन पर लगाम नहीं लगा पा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 साल में शहर में 118 निजी अस्पताल खोले जा चुके हैं। जबकि जिले में इनकी कुल संख्या 200 के पार हो गई है। दर्ज नर्सिंग होम में शहर में सिर्फ 25 वहीं अलग-अलग ब्लॉकों व तहसील स्तर पर 93 अस्पताल संचालित हैं। अन्य नर्सिंग होम में अवैध तरीके से मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिम्मेदार नवीनीकरण के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

ये हैं मानक

– हॉस्पिटल के मेन गेट पर पैनल डॉक्टरों की सूची लगी हो।

– सीज फायर की एनओसी होनी चाहिए।

– मेडिकल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का सर्टिफिकेट अनिवार्य।

– ओटी टेबल, ऑपरेशन के उपकरण होना जरूरी।

– मरीज भ्रमित न हों इसके लिए रेट लिस्ट चस्पा हो।

– मरीजों के लिए पर्याप्त बेड हों।

सात माह पूर्व चला था अभियान

करीब सात माह पहले नवाबगंज के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के बाद डीएम के निर्देश पर अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इसमें शहर के कब्बाखेड़ा में दो नर्सिंगहोम को फर्जी तरीके से ट्रामा सेंटर लिखने और मानक के अनुसार उपकरण व स्टाफ न होने पर बंद कराया गया था। सिकंदरपुर सरोसी में बिना रजिस्ट्रेशन खुले नर्सिंग होम पर भी कार्रवाई की गई थी। सफीपुर और बांगरमऊ में बिना अनुमति संचालित दो क्लीनिकों पर प्रशासन ने ताला लगवाया था।

बिना पंजीकरण किसी भी निजी अस्पताल का संचालन नहीं होने देंगे। अस्पतालों का नवीनीकरण मई में पूरा हो जाएगा। इसमें जो नवीनीकरण नहीं कराएंगे, उन्हें पूरी तरह से बंद करा दिया जाएगा। – डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ

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