नर्सिग होम में मानक नहीं

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उन्नाव। गली-गली खुले प्राइवेट अस्पताल खुद मोटी कमाई कर रहे हैं और लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। दो से तीन कमरों का घर और कुछ बेड डाल दिए, बन गया नर्सिंग होम। न वार्ड और न ऑपरेशन थियेटर। बस हर माह चढ़ावा चढ़ाते रहो। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इसी तरह प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं।
किराये पर संचालन, डॉक्टरों की सूची और न फीस लिस्ट
अचलगंज कस्बे में संचालित चार प्राइवेट अस्पतालों में मंगलवार दोपहर एक बजे बदइंतजामी दिखी। कस्बे से लोहचा मोड़ तक एक किलोमीटर दायरे में चार अस्पताल खुले हैं। तीन रिहायशी इमारतों को किराये पर लेकर अस्पताल खोल रखा है। यहां न तो वार्ड की व्यवस्था ठीक है और न ऑपरेशन थियेटर की। पैनल बोर्ड में एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम लिखे हैं लेकिन वार्ड ब्वाय और नर्स ही इलाज करते दिखे। न तो फीस लिस्ट लगी मिली और न मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था। नर्स ने बताया कि मरीज को मर्ज के हिसाब से फीस और डॉक्टर की जानकारी दी जाती है। लोहचा मोड़ के निकट प्राइवेट अस्पताल का संचालन डॉक्टर दंपती करते हैं। लेकिन अस्पताल में न ही डॉक्टरों की सूची है और न फीस लिस्ट।
प्रतिदिन चार से पांच हजार खर्च बताया
बीघापुर के दुबाई गांव निवासी तीमारदार विनोद राजपूत ने बताया कि पत्नी को सिरदर्द होने के बाद बेहोश होने पर शनिवार को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने प्रतिदिन के हिसाब से चार से पांच हजार का खर्च बताया है।
अचलगंज कस्बा निवासी जितेंद्र ने बताया कि बहन को खून की कमी होने पर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया है। इलाज के हिसाब से पैसा बताया गया है। जांच व दवाओं का पैसा अलग से जमा करना है।

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उन्नाव। गली-गली खुले प्राइवेट अस्पताल खुद मोटी कमाई कर रहे हैं और लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। दो से तीन कमरों का घर और कुछ बेड डाल दिए, बन गया नर्सिंग होम। न वार्ड और न ऑपरेशन थियेटर। बस हर माह चढ़ावा चढ़ाते रहो। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इसी तरह प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं।

किराये पर संचालन, डॉक्टरों की सूची और न फीस लिस्ट

अचलगंज कस्बे में संचालित चार प्राइवेट अस्पतालों में मंगलवार दोपहर एक बजे बदइंतजामी दिखी। कस्बे से लोहचा मोड़ तक एक किलोमीटर दायरे में चार अस्पताल खुले हैं। तीन रिहायशी इमारतों को किराये पर लेकर अस्पताल खोल रखा है। यहां न तो वार्ड की व्यवस्था ठीक है और न ऑपरेशन थियेटर की। पैनल बोर्ड में एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम लिखे हैं लेकिन वार्ड ब्वाय और नर्स ही इलाज करते दिखे। न तो फीस लिस्ट लगी मिली और न मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था। नर्स ने बताया कि मरीज को मर्ज के हिसाब से फीस और डॉक्टर की जानकारी दी जाती है। लोहचा मोड़ के निकट प्राइवेट अस्पताल का संचालन डॉक्टर दंपती करते हैं। लेकिन अस्पताल में न ही डॉक्टरों की सूची है और न फीस लिस्ट।

प्रतिदिन चार से पांच हजार खर्च बताया

बीघापुर के दुबाई गांव निवासी तीमारदार विनोद राजपूत ने बताया कि पत्नी को सिरदर्द होने के बाद बेहोश होने पर शनिवार को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने प्रतिदिन के हिसाब से चार से पांच हजार का खर्च बताया है।

अचलगंज कस्बा निवासी जितेंद्र ने बताया कि बहन को खून की कमी होने पर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया है। इलाज के हिसाब से पैसा बताया गया है। जांच व दवाओं का पैसा अलग से जमा करना है।

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