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देव उठनी एकादशी आज: बनारस में लोगों ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, घाटों पर सुबह से भारी भीड़

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पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी

पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी
– फोटो : अमर उजाला

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आज देव उठनी एकादशी है। कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। 
वाराणसी में हरि प्रबोधिनी (देव उठनी एकादशी) पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।  दशाश्वमेध,शीतलाघाट,पंचगंगा,अस्सीघाट,भैसासुरघाट पर गंगा स्नान के लिए भोर से भीड़ उमड़ रही है। स्नान के बाद लोग दानपुण्य कर श्री हरि की आराधना कर रहे हैं।
प्रबोधिनी एकादशी पर ही चराचर जगत के पालनहार श्री हरि भी चार मास की योग निद्रा से जाग गये। श्री हरि के योग निद्रा से जागने के बाद मांगलिक कार्य भी शुरू जायेंगे। शहर के प्रमुख चौराहों, मोहल्लों में लगे गन्ने की अस्थाई दुकानों पर जमकर खरीददारी हुई। 

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विस्तार

आज देव उठनी एकादशी है। कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। 

वाराणसी में हरि प्रबोधिनी (देव उठनी एकादशी) पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई।  दशाश्वमेध,शीतलाघाट,पंचगंगा,अस्सीघाट,भैसासुरघाट पर गंगा स्नान के लिए भोर से भीड़ उमड़ रही है। स्नान के बाद लोग दानपुण्य कर श्री हरि की आराधना कर रहे हैं।

प्रबोधिनी एकादशी पर ही चराचर जगत के पालनहार श्री हरि भी चार मास की योग निद्रा से जाग गये। श्री हरि के योग निद्रा से जागने के बाद मांगलिक कार्य भी शुरू जायेंगे। शहर के प्रमुख चौराहों, मोहल्लों में लगे गन्ने की अस्थाई दुकानों पर जमकर खरीददारी हुई। 



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