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Allahabad High Court : प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त और महानिरीक्षक निबंधक 21 नवंबर को तलब

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Allahabad High Court

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– फोटो : अमर उजाला

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निबंधक विभाग में तैनात 392 क्लर्कों के नियमितिकरण के मामले में प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त और महानिरीक्षक निबंधक को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों अधिकारी पेश होकर यह बताएं कि उनके आदेश का अब तक अनुपालन क्यों नहीं किया गया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तिथि तय की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली ने प्रह्लाद सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से कहा गया कि निबंधक विभाग में 392 क्लर्कों के नियमित किए जाने के मामले में कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2017 को ही आदेश पारित कर दिया था। यह आदेश दिया था कि क्लर्कों को उसके आदेश के तहत नियमित किया जाए लेकिन आज तक उसके आदेश का पालन नहीं किया गया। विभाग ने क्लर्कों के नियमितीकरण को रोक रखा है।

कहा गया कि क्लर्कों के नियमितीकरण केबारे में तीन सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। उसने अपनी रिपोर्ट भी आठ अगस्त 2018 को प्रस्तुत कर दी थी। सरकार ने रिपोर्ट भी मांगी थी। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और नियमितीकरण को रोकने वाले अफसर पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, इस पर कोर्ट का स्पष्ट आदेश पारित है। इस पर कोर्ट ने 21 नवंबर को पेश होकर जवाब देने को कहा है। 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निबंधक विभाग में तैनात 392 क्लर्कों के नियमितिकरण के मामले में प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त और महानिरीक्षक निबंधक को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों अधिकारी पेश होकर यह बताएं कि उनके आदेश का अब तक अनुपालन क्यों नहीं किया गया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 21 नवंबर की तिथि तय की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली ने प्रह्लाद सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से कहा गया कि निबंधक विभाग में 392 क्लर्कों के नियमित किए जाने के मामले में कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2017 को ही आदेश पारित कर दिया था। यह आदेश दिया था कि क्लर्कों को उसके आदेश के तहत नियमित किया जाए लेकिन आज तक उसके आदेश का पालन नहीं किया गया। विभाग ने क्लर्कों के नियमितीकरण को रोक रखा है।

कहा गया कि क्लर्कों के नियमितीकरण केबारे में तीन सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। उसने अपनी रिपोर्ट भी आठ अगस्त 2018 को प्रस्तुत कर दी थी। सरकार ने रिपोर्ट भी मांगी थी। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और नियमितीकरण को रोकने वाले अफसर पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि, इस पर कोर्ट का स्पष्ट आदेश पारित है। इस पर कोर्ट ने 21 नवंबर को पेश होकर जवाब देने को कहा है। 



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