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UP Election 2022: क्या मोदी-योगी के सामने भी कायम रहेगी ‘श्याम’ लहर, नौंवी बार मैदान में मथुरा का ‘चाणक्य’

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सार

अमर उजाला से चर्चा में मांट निवासी एडवोकेट जगदीश शर्मा कहते है कि बसपा उम्मीदवार श्याम सुंदर शर्मा को मथुरा की राजनीति चाणक्य कहा जाता है। 40 साल की राजनीति में शर्मा ने कभी भी हार का मुंह का नहीं देखा। राम मंदिर आंदोलन की लहर हो फिर देश में मोदी और यूपी में योगी की लहर लेकिन मांट विधानसभा में श्याम की लहर होती हैं। पढ़ें मांट से हमारे विशेष संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट…

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मथुरा जिले की मांट विधानसभा सीट का अपना अलग ही मिजाज है। अब तक सियासी चक्रव्यूह के आठ द्वार भेद कर विधानसभा पहुंचे 70 वर्षीय श्याम सुंदर शर्मा फिर से बसपा के हाथी पर सवार होकर नौंवी बार विधान भवन पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। मथुरा की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शर्मा के रथ को रोकने के लिए इस बार विरोधी दलों ने जातीय गोलबंदी भी की है। जाटों के दबदबे वाली इस सीट भाजपा ने युवा चेहरे राजेश चौधरी पर दांव खेला है। वहीं एसपी-आरएलडी गठबंधन से प्रत्याशी संजय लाठर 2012 के उपचुनाव के बाद एक बार फिर इस सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जबकि, कांग्रेस ने महिला कार्ड खेलते हुए सुमन चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। लेकिन इसके बाद भी मतदाता दबी जुबान में यह कहते हुए नजर आ रहे है ‘देश में चाहे मोदी लहर हो या फिर यूपी योगी लहर, हमारे मांट में केवल श्याम लहर ही दिखाई देती है।’ मोदी-योगी लहर में किसी भी मुद्दे का ऐसा प्रभाव नहीं हुआ कि मांट सीट से श्याम सुंदर शर्मा के पांव उखड़ जाएं।

मथुरा के चाणक्य के नाम से लोकप्रिय है शर्मा

अमर उजाला से चर्चा में मांट निवासी एडवोकेट जगदीश शर्मा कहते है कि बसपा उम्मीदवार श्याम सुंदर शर्मा को मथुरा की राजनीति चाणक्य कहा जाता है। 40 साल की राजनीति में शर्मा ने कभी भी हार का मुंह का नहीं देखा। राम मंदिर आंदोलन की लहर हो फिर देश में मोदी और यूपी में योगी की लहर लेकिन मांट विधानसभा में श्याम की लहर होती हैं।

निवासी सुखवीर सिंह कहते है कि शर्मा एकमात्र ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जो सुबह छह बजे लेकर रात 12 बजे तक सभी के लिए मौजूद रहते हैं। आज मथुरा जिले में एक मात्र राजकीय डिग्री कॉलेज वह शर्मा के प्रयासों का ही फल है। पहले यहां के छात्र पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली पढ़ाई के लिए जाते थे, लेकिन अब अन्य राज्यों से नहीं बल्कि विदेशों से भी छात्र इस कॉलेज में पढ़ने के लिए आते है।

इस खेल में कभी आउट नहीं हुआ

बसपा उम्मीदवार श्याम सुंदर शर्मा अमर उजाला से चर्चा कहते हुए कहते हैं कि मैं जब यूपी मंत्री था, तब एक विदेश दौरे पर मुझसे पूछा गया कि आप कौन सा खेल खेलते हो? हम मोटे तो थे ही, मैंने कहा, जिंदगी में मैंने कोई खेल नहीं खेला। बस एक खेल खेला है वह है राजनीति का। इसमें कभी आउट नहीं हुआ। मैं अपने हर चुनाव को एक चुनौती के रूप में लेता हूं और बड़ी ही जिम्मेदारी और विनम्रता के साथ अपने विरोधियों से लड़ता हूं। जनता की कोई भी समस्या हो उसका समाधान शालीनता, प्रेम और स्नेह से करता हूं। लगातार लोगों के बीच जीवंत संवाद बनाए रखता हूं, जिसका परिणाम है कि मैं आठ चुनकर विधान भवन पहुंचा हूं।

शर्मा कहते है कि मैंने किसी राजनीतिक दल की परवाह नहीं की। पिछला चुनाव मैंने बसपा से लड़ा था। उसके पहले तो मैं निर्दलीय विधायक भी रहा हूं। तृणमूल कांग्रेस के टिकट से भी विधायक बना। चार बार लोकतांत्रिक कांग्रेस, एक बार तिवारी कांग्रेस और एक बार निर्दलीय विधायक भी रह लिया। मांट सीट पर जातिवाद धर्मवाद का कुछ महत्व नहीं है। हमारे यहां केवल कर्मवाद का महत्व है। मेरे क्षेत्र का बच्चा-बच्चा मेरे लिए मंत्री है। उसके लिए मैं संतरी हूं। आज गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग के दावे के साथ कहते हैं कि अगर श्याम सुंदर शर्मा विधायक बन गया तो हम ही बन गए।  

बसपा में नहीं मिल रही बड़ी पहचान

मांट में मंत्री जी के नाम से जाने पहचाने वाले श्याम सुंदर शर्मा लंबे वक्त से बसपा की राजनीति कर रहे हैं। आसपास की कई अहम सीटों पर बसपा उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी बसपा प्रमुख मायावती ने शर्मा को दी है। मांट विधानसभा पर मतदान के बाद वे राज्य कई सीटों पर जाकर प्रचार का जिम्मा भी संभालेंगे। लेकिन श्याम सुंदर शर्मा के कट्टर समर्थकों को इस बात का मलाल है कि बसपा में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जगह और पहचान नहीं मिल रही है।

विधायक झगड़ा करवाते हैं

जाटों के प्रभाव वाली इस सीट पर सपा-रालोद गठबंधन ने मांट में संजय लाठर को उम्मीदवार बनाया है। मांट में अखिलेश और जयंत ने रैली के जरिए मतदाताओं को रिझाने की कोशिश भी की। जबकि भाजपा के उम्मीदवार राजेश चौधरी के समर्थन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और गिरिराज सिंह जैसे बड़े नेता प्रचार कर चुके हैं।

अमर उजाला से फोन पर चर्चा में राजेश चौधरी कहते हैं कि मांट क्षेत्र में भाजपा का सूखा खत्म होकर रहेगा। यहां कमल खिलेगा। आज क्षेत्र की जनता चाहती है कि यहां का विकास हो। मांट यूपी की सबसे पिछड़ी विधानसभा है। यहां कोई इलाज का साधन नहीं है। यहां के विधायक झगड़ा कराने के अलावा कुछ नहीं करते हैं।

यह है समीकरण

बसपा से विधायक श्याम सुंदर शर्मा कांग्रेस, लोकतांत्रिक कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस से होते हुए बसपा के टिकट पर 2017 में आठवीं बार विधायक बने। इस बार फिर बसपा से ही मैदान में डटे हुए हैं। हालांकि 2012 में विधानसभा चुनाव में एक बार वह जयंत चौधरी से हार का मुंह देख चुके हैं। लेकिन बाद में मथुरा से सांसद जयंत चौधरी को विधायक पद से इस्तीफा देना पड़ा और इस सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें श्याम सुंदर शर्मा तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे फिर से जीत हासिल की। 2017 में बसपा के श्याम सुंदर रालोद के योगेश नौहवार से महज 432 वोटों से ही चुनाव जीते थे। कमल के लिए हमेशा बंजर रही मांट की सीट पर 2017 में पहली बार भाजपा करीब 60 हजार वोट लाई।

मांट में एक लाख से अधिक जाट मतदाता हैं। करीब 55 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। दलित करीब 42 हजार तो ठाकुर मतदाता 38 हजार हैं। मुस्लिम 22 हजार, वैश्य 20 हजार, गुर्जर, बघेल और निषाद 12-12 हजार हैं। श्याम सुंदर शर्मा इन सभी जातियों में अपनी पकड़ रखते हैं। लेकिन भाजपा, सपा गठबंधन और कांग्रेस उनका खेल बिगाड़ने की कोशिश में हैं। श्याम सुंदर शर्मा की कोशिश ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्ग के सहारे नौवीं बार अपनी विजय पताका फहराने की है।

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विस्तार

मथुरा जिले की मांट विधानसभा सीट का अपना अलग ही मिजाज है। अब तक सियासी चक्रव्यूह के आठ द्वार भेद कर विधानसभा पहुंचे 70 वर्षीय श्याम सुंदर शर्मा फिर से बसपा के हाथी पर सवार होकर नौंवी बार विधान भवन पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। मथुरा की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शर्मा के रथ को रोकने के लिए इस बार विरोधी दलों ने जातीय गोलबंदी भी की है। जाटों के दबदबे वाली इस सीट भाजपा ने युवा चेहरे राजेश चौधरी पर दांव खेला है। वहीं एसपी-आरएलडी गठबंधन से प्रत्याशी संजय लाठर 2012 के उपचुनाव के बाद एक बार फिर इस सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जबकि, कांग्रेस ने महिला कार्ड खेलते हुए सुमन चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। लेकिन इसके बाद भी मतदाता दबी जुबान में यह कहते हुए नजर आ रहे है ‘देश में चाहे मोदी लहर हो या फिर यूपी योगी लहर, हमारे मांट में केवल श्याम लहर ही दिखाई देती है।’ मोदी-योगी लहर में किसी भी मुद्दे का ऐसा प्रभाव नहीं हुआ कि मांट सीट से श्याम सुंदर शर्मा के पांव उखड़ जाएं।

मथुरा के चाणक्य के नाम से लोकप्रिय है शर्मा

अमर उजाला से चर्चा में मांट निवासी एडवोकेट जगदीश शर्मा कहते है कि बसपा उम्मीदवार श्याम सुंदर शर्मा को मथुरा की राजनीति चाणक्य कहा जाता है। 40 साल की राजनीति में शर्मा ने कभी भी हार का मुंह का नहीं देखा। राम मंदिर आंदोलन की लहर हो फिर देश में मोदी और यूपी में योगी की लहर लेकिन मांट विधानसभा में श्याम की लहर होती हैं।

निवासी सुखवीर सिंह कहते है कि शर्मा एकमात्र ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जो सुबह छह बजे लेकर रात 12 बजे तक सभी के लिए मौजूद रहते हैं। आज मथुरा जिले में एक मात्र राजकीय डिग्री कॉलेज वह शर्मा के प्रयासों का ही फल है। पहले यहां के छात्र पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दिल्ली पढ़ाई के लिए जाते थे, लेकिन अब अन्य राज्यों से नहीं बल्कि विदेशों से भी छात्र इस कॉलेज में पढ़ने के लिए आते है।

इस खेल में कभी आउट नहीं हुआ

बसपा उम्मीदवार श्याम सुंदर शर्मा अमर उजाला से चर्चा कहते हुए कहते हैं कि मैं जब यूपी मंत्री था, तब एक विदेश दौरे पर मुझसे पूछा गया कि आप कौन सा खेल खेलते हो? हम मोटे तो थे ही, मैंने कहा, जिंदगी में मैंने कोई खेल नहीं खेला। बस एक खेल खेला है वह है राजनीति का। इसमें कभी आउट नहीं हुआ। मैं अपने हर चुनाव को एक चुनौती के रूप में लेता हूं और बड़ी ही जिम्मेदारी और विनम्रता के साथ अपने विरोधियों से लड़ता हूं। जनता की कोई भी समस्या हो उसका समाधान शालीनता, प्रेम और स्नेह से करता हूं। लगातार लोगों के बीच जीवंत संवाद बनाए रखता हूं, जिसका परिणाम है कि मैं आठ चुनकर विधान भवन पहुंचा हूं।

शर्मा कहते है कि मैंने किसी राजनीतिक दल की परवाह नहीं की। पिछला चुनाव मैंने बसपा से लड़ा था। उसके पहले तो मैं निर्दलीय विधायक भी रहा हूं। तृणमूल कांग्रेस के टिकट से भी विधायक बना। चार बार लोकतांत्रिक कांग्रेस, एक बार तिवारी कांग्रेस और एक बार निर्दलीय विधायक भी रह लिया। मांट सीट पर जातिवाद धर्मवाद का कुछ महत्व नहीं है। हमारे यहां केवल कर्मवाद का महत्व है। मेरे क्षेत्र का बच्चा-बच्चा मेरे लिए मंत्री है। उसके लिए मैं संतरी हूं। आज गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग के दावे के साथ कहते हैं कि अगर श्याम सुंदर शर्मा विधायक बन गया तो हम ही बन गए।  

बसपा में नहीं मिल रही बड़ी पहचान

मांट में मंत्री जी के नाम से जाने पहचाने वाले श्याम सुंदर शर्मा लंबे वक्त से बसपा की राजनीति कर रहे हैं। आसपास की कई अहम सीटों पर बसपा उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी बसपा प्रमुख मायावती ने शर्मा को दी है। मांट विधानसभा पर मतदान के बाद वे राज्य कई सीटों पर जाकर प्रचार का जिम्मा भी संभालेंगे। लेकिन श्याम सुंदर शर्मा के कट्टर समर्थकों को इस बात का मलाल है कि बसपा में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जगह और पहचान नहीं मिल रही है।

विधायक झगड़ा करवाते हैं

जाटों के प्रभाव वाली इस सीट पर सपा-रालोद गठबंधन ने मांट में संजय लाठर को उम्मीदवार बनाया है। मांट में अखिलेश और जयंत ने रैली के जरिए मतदाताओं को रिझाने की कोशिश भी की। जबकि भाजपा के उम्मीदवार राजेश चौधरी के समर्थन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और गिरिराज सिंह जैसे बड़े नेता प्रचार कर चुके हैं।

अमर उजाला से फोन पर चर्चा में राजेश चौधरी कहते हैं कि मांट क्षेत्र में भाजपा का सूखा खत्म होकर रहेगा। यहां कमल खिलेगा। आज क्षेत्र की जनता चाहती है कि यहां का विकास हो। मांट यूपी की सबसे पिछड़ी विधानसभा है। यहां कोई इलाज का साधन नहीं है। यहां के विधायक झगड़ा कराने के अलावा कुछ नहीं करते हैं।

यह है समीकरण

बसपा से विधायक श्याम सुंदर शर्मा कांग्रेस, लोकतांत्रिक कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस से होते हुए बसपा के टिकट पर 2017 में आठवीं बार विधायक बने। इस बार फिर बसपा से ही मैदान में डटे हुए हैं। हालांकि 2012 में विधानसभा चुनाव में एक बार वह जयंत चौधरी से हार का मुंह देख चुके हैं। लेकिन बाद में मथुरा से सांसद जयंत चौधरी को विधायक पद से इस्तीफा देना पड़ा और इस सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें श्याम सुंदर शर्मा तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे फिर से जीत हासिल की। 2017 में बसपा के श्याम सुंदर रालोद के योगेश नौहवार से महज 432 वोटों से ही चुनाव जीते थे। कमल के लिए हमेशा बंजर रही मांट की सीट पर 2017 में पहली बार भाजपा करीब 60 हजार वोट लाई।

मांट में एक लाख से अधिक जाट मतदाता हैं। करीब 55 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं। दलित करीब 42 हजार तो ठाकुर मतदाता 38 हजार हैं। मुस्लिम 22 हजार, वैश्य 20 हजार, गुर्जर, बघेल और निषाद 12-12 हजार हैं। श्याम सुंदर शर्मा इन सभी जातियों में अपनी पकड़ रखते हैं। लेकिन भाजपा, सपा गठबंधन और कांग्रेस उनका खेल बिगाड़ने की कोशिश में हैं। श्याम सुंदर शर्मा की कोशिश ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्ग के सहारे नौवीं बार अपनी विजय पताका फहराने की है।

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