Home उत्तर प्रदेश Agra: मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने पर अस्पताल स्टाफ ने गर्भवती महिला...

Agra: मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत करने पर अस्पताल स्टाफ ने गर्भवती महिला को किया रेफर, गर्भस्थ शिशु की मौत

0
79

[ad_1]

ख़बर सुनें

आगरा के जिला महिला अस्पताल (लेडी लॉयल) में इलाज न मिलने पर गर्भवती को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। पीड़ित भाई ने यह आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल और महिला आयोग में शिकायत की है। 

आजमपाड़ा निवासी गुलचमन शेरवानी ने बताया कि छह माह की गर्भवती बहन शमीम उस्मानी (25) को रक्तस्राव के कारण सात जुलाई की सुबह लेडी लॉयल में भर्ती कराया था। इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर दो गर्भवती लेटी थीं। कोरोना का खतरा जताते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कर दी। 

आठ जुलाई को हुई थी गर्भस्थ शिशु की मौत 

इस पर अस्पताल स्टाफ भड़क गया और कहा कि यहां ऐसी ही स्थिति है। कहीं निजी अस्पताल में भर्ती कर लो। यहां कराई जांच रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 3.5 ग्राम प्रति मिलीमीटर है। रेफर होने पर आठ जुलाई को बहन को निजी अस्पताल लेकर गए, वहां जांच में 9.6 ग्राम प्रति मिलीमीटर हीमोग्लोबिन आया। उसी दिन गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। 

गुलचमन ने आरोप लगाया कि यदि लेडी लॉयल में मरीज को पूरा उपचार मिलता तो गर्भस्थ शिशु की जान बच सकती थी। मुख्यमंत्री पोर्टल व महिला आयोग के नंबर पर उन्होंने इसकी शिकायत की है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि सभी मरीजों का बेहतर इलाज होता है, ऐसा कोई मामला जानकारी में नहीं है, फिर भी बृहस्पतिवार को इसका पता करवाता हूं।

यह भी पढ़ें -  आजमगढ़ चुनाव प्रचार से क्यों दूर हुए अखिलेश, कहीं वजह रामपुर और आजम खान तो नहीं!

विस्तार

आगरा के जिला महिला अस्पताल (लेडी लॉयल) में इलाज न मिलने पर गर्भवती को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। पीड़ित भाई ने यह आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल और महिला आयोग में शिकायत की है। 

आजमपाड़ा निवासी गुलचमन शेरवानी ने बताया कि छह माह की गर्भवती बहन शमीम उस्मानी (25) को रक्तस्राव के कारण सात जुलाई की सुबह लेडी लॉयल में भर्ती कराया था। इमरजेंसी वार्ड में एक बेड पर दो गर्भवती लेटी थीं। कोरोना का खतरा जताते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कर दी। 

आठ जुलाई को हुई थी गर्भस्थ शिशु की मौत 

इस पर अस्पताल स्टाफ भड़क गया और कहा कि यहां ऐसी ही स्थिति है। कहीं निजी अस्पताल में भर्ती कर लो। यहां कराई जांच रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन 3.5 ग्राम प्रति मिलीमीटर है। रेफर होने पर आठ जुलाई को बहन को निजी अस्पताल लेकर गए, वहां जांच में 9.6 ग्राम प्रति मिलीमीटर हीमोग्लोबिन आया। उसी दिन गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। 

गुलचमन ने आरोप लगाया कि यदि लेडी लॉयल में मरीज को पूरा उपचार मिलता तो गर्भस्थ शिशु की जान बच सकती थी। मुख्यमंत्री पोर्टल व महिला आयोग के नंबर पर उन्होंने इसकी शिकायत की है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि सभी मरीजों का बेहतर इलाज होता है, ऐसा कोई मामला जानकारी में नहीं है, फिर भी बृहस्पतिवार को इसका पता करवाता हूं।

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here