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हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह, हृदय की पंपिंग क्षमता 50 प्रतिशत से कम, तो जल्द शरू करें इलाज

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लखनऊ : इको जांच में अगर हृदय की पंपिंग क्षमता 50 प्रतिशत से कम है तो सतर्क हो जाना चाहिए। तत्काल हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलकर इलाज शुरु करा देना चाहिए। लापरवाही घातक साबित हो सकती है। यह कहना है इटली के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. फिलिप्पो क्रिया का। वह इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के वार्षिक सम्मेलन के दूसरे शुक्रवार को हार्ट फेलियर के विषय पर चर्चा कर रहे थे ।

डॉ. फिलिप्पो ने बताया कि आधुनिक उपचार के कारण व्यक्ति की उम्र तो बढ़ी है पर साथ ही साथ हार्ट फेलियर के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। अगर किसी व्यक्ति की चलने-फिरने में सांस फूल रही है, जल्दी थकान हो जा रही है तो उसे अपने हार्ट की जांच जरूर करानी चाहिए। यह लक्षण हार्ट फेलियर का प्रारंभिक लक्षण हो सकता हैं। अमेरिका के चिकित्सक डॉ. नवीन सी नंदा ने इको से हार्ट फेलियर की जांच के बारे में अपनी जानकारी साझा की। दिल्ली के डॉ. विवेक कुमार ने हार्ट फेलियर के गुर्दे पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और उसके उपचार के बारे में जानकारी दी। अमेरिका के डॉ. नताशा पांडिया ने इस वर्ष की दस बड़ी रिसर्च के बारे में बताया। केजीएमयू के डॉ. ऋषि सेठी व ऑस्ट्रेलिया के डॉ. आंद्रे एन ने हार्ट की पंपिंग क्षमता कम होने पर कॉम्बो डिवाइस की उपयोगिता के बारे में बताया।

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प्लेनरी सेशन में डॉ. प्रभाकरण ने बताया कि शुगर के रोगियों में हार्ट अटैक की संभावना 3 से 4 गुना अधिक होती है। देश की प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी विजयलक्ष्मी ने हृदय रोगों के उपचार में रोगी की मानसिक स्थिति की सबलता व डिवाइन पॉवर पर अपने विचार साझा किए। डॉ. धीमान काहली ने बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के उपचार पर अपने विचार दिए। डॉ. अश्वनी मेहता ने एंजियोप्लास्टी के बाद रोगी को क्या एहतियात रखनी चाहिए के विषय में बताया। डॉ. अनीता सक्सेना व डॉ. रूपाली खन्ना ने महिलाओं में होने वाले हृदय रोगों पर चर्चा की। डॉ. पीसी मंडल व डॉ. गणेशन ने रूमैटिक हार्ट डिजीस के बारे में बताया। इसके आलावा स्नातकोत्तर छात्रों ने अपनी नई शोधों पर पेपर प्रस्तुत किए। विभिन्न संस्थानों से आए टेक्नीशियन व नर्सेस ने हृदय रोगों से संबंधित विभिन्न कार्यशालाओं में प्रतिभाग किया।

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