HighCourt : आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाने पर रोक से कोर्ट का इनकार

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अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 08 Feb 2022 01:45 AM IST

सार

याची ने हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन किया था कि उसकी भूमि पर आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाया जा रहा है, जोकि नियमों के विपरीत है। याची के अधिवक्ता इश्तियाक खान ने तर्क दिया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी स्वीकृति नहीं ली गई है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर में आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाने के मामले में कहा है कि याची को हाईकोर्ट आने के बजाय मजिस्ट्रेट के समक्ष अभ्यावेदन कर वैकल्पिक लाभ उठाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है। खंडपीठ सहारनपुर केअफजाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी।

याची ने हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन किया था कि उसकी भूमि पर आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाया जा रहा है, जोकि नियमों के विपरीत है। याची के अधिवक्ता इश्तियाक खान ने तर्क दिया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी स्वीकृति नहीं ली गई है। याची ने टॉवर लगाने को लेकर निर्देश दिए जाने की मांग की थी।

मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में सीधे हाईकोर्ट आने के बजाय मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना चाहिए। मजिस्ट्रेट इस मामले में उचित निर्णय लेने केलिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने मामले मेंगुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना याचिका खारिज कर दी।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर में आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाने के मामले में कहा है कि याची को हाईकोर्ट आने के बजाय मजिस्ट्रेट के समक्ष अभ्यावेदन कर वैकल्पिक लाभ उठाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है। खंडपीठ सहारनपुर केअफजाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी।

याची ने हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन किया था कि उसकी भूमि पर आबादी के बीच 5जी टॉवर लगाया जा रहा है, जोकि नियमों के विपरीत है। याची के अधिवक्ता इश्तियाक खान ने तर्क दिया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी स्वीकृति नहीं ली गई है। याची ने टॉवर लगाने को लेकर निर्देश दिए जाने की मांग की थी।

मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि मामले में सीधे हाईकोर्ट आने के बजाय मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना चाहिए। मजिस्ट्रेट इस मामले में उचित निर्णय लेने केलिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने मामले मेंगुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना याचिका खारिज कर दी।

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