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घिरोर के गांव बादशाहपुर निवासी ग्राहक सेवा केंद्र संचालक अमीर सिंह 21 जुलाई को घर से बैंक जाने की बात कहकर निकला था। इसके बाद नहीं लौटा था। देर रात उसका शव दन्नाहार क्षेत्र में नहर किनारे पड़ा मिला था। उसकी चाकू से हत्या की गई थी। पत्नी की ओर से अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अमीर सिंह की हत्या और लूट की घटना का खुलासा करने के लिए एसपी कमलेश दीक्षित ने स्वाट टीम प्रभारी विक्रम सिंह को लगाया था। थाना दन्नाहार पुलिस भी खुलासे के प्रयास कर रही थी। इस बीच स्वाट टीम के हाथ घटना वाले दिन बैंक के बाहर के सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे। इसमें अमीर और उसके तीन दोस्त सोनू, रतनवीर और विनय भी मौजूद थे। सभी आपस में बातें कर रहे थे। इसके बाद वहां से चले गए। इससे भी यह जाहिर नहीं हो रहा था कि हत्या करने वाले यही लोग हैं।
जांच के दौरान स्वाट टीम प्रभारी को घटनास्थल पर मृतक के एक फोटो में हत्यारोपी की पहचान मिल गई। मृतक के सिर के पास भगवा रंग का गमछा पड़ा हुआ था। जब बैंक के बाहर के सीसीटीवी देखे तो अमीर के साथ मौजूद एक दोस्त उक्त गमछा कंधे पर डाले हुए था। जब साथियों के बारे में जानकारी ली तो वे घर से नदारद थे। हत्यारोपियों की पहचान होने के बाद से ही पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी।
स्वाट टीम प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि घटना के समय सोनू कार चला रहा था। पास की सीट पर अमीर सिंह बैठा हुआ था। पीछे विनय और रतनवीर बैठे हुए थे। दो लाख रुपये लूटने के लिए विनय ने पीछे से अमीर के गले में गमछा डाल दिया। रतनवीर ने चाकू से सीने पर कई वार किए, गर्दन की नस कटने की वजह से अमीर सिंह की मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को नहर में फेंकना चाहा, लेकिन वह किनारे पर ही गिर गया। कार भी नहर की पटरी में फंस गई, जिस वजह से आरोपी पैदल ही वहां से भाग गए थे। भागते समय इन लोगों ने राजू को फोन कर बुलाया और उसकी बाइक पर बैठकर कर आरोपी भाग गए थे। आरोपियों ने दो लाख रुपये आपस में बांट लिए थे। विनय और रतनवीर मोबाइल स्विच ऑफ कर गायब हो गए थे। सोमवार को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान राजू यादव, सोनू और रतनवीर को गिरफ्तार कर लिया।
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