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Mathura News: ईदगाह के अमीन निरीक्षण के दौरान 12 से अधिक लोग रहेंगे मौजूद, जानिए कब शुरू होगी प्रक्रिया

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श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद
– फोटो : अमर उजाला

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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामले में हिंदू सेना के दावे पर अदालत ने ईदगाह का अमीन सर्वे करने का आदेश किया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन-तृतीय सोनिका वर्मा की ओर से ईदगाह का अमीन निरीक्षण कर रिपोर्ट दिए जाने के आदेश के बाद सभी पक्ष अमीन रिपोर्ट व इसके बाद की तैयारियों में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि अमीन रिपोर्ट के समय ईदगाह में करीब 12 से अधिक लोग मौजूद रहेंगे। यह प्रक्रिया दो जनवरी को शीतकालीन अवकाश के बाद कोर्ट खुलने के बाद शुरू होगी।
 
वादी के अधिवक्ता शैलेष दुबे ने बताया कि न्यायालय के अमीन के मौके का निरीक्षण के समय वह खुद व उनके साथी अधिवक्ता संदीप शर्मा, वादीगण विष्णु गुप्ता और सुरजीत सिंह यादव को मौके पर रहने का अधिकार है। साथ ही जो चार प्रतिवादीगण हैं वह और उनका एक-एक अधिवक्ता भी चाहें तो अमीन निरीक्षण के समय मौके पर रह सकते हैं। 

दो जनवरी से शुरू हो सकती है प्रक्रिया 

विधि विशेषज्ञों के अनुसार दो जनवरी को अदालत खुलने के बाद अदालती प्रक्रिया के तहत अमीन खुद मौके पर जाएंगे। जाने से पहले वह वादी व उनके अधिवक्ता और उभय पक्ष को सूचित करेंगे। जिसके बाद ईदगाह में पहुंचकर निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करेंगे। मौके पर दोनों पक्षों की मौजूदगी के तौर पर साक्ष्य के तौर पर हस्ताक्षर भी कराएं जाएंगे। अमीन द्वारा विवादित स्थल की दिशा बताई जाएंगी कि वह किस दिशा में स्थित है और उसके अंदर प्रवेश करके बताया जाएगा कि स्थल के अंदर क्या-क्या निर्माण हैं। यदि वहां पर कोई विशेष निर्माण है तो उसका उल्लेख भी करना होगा।

मंदिर के साक्ष्यों को नष्ट करने संबंधी दिया है प्रार्थना पत्र 

करीब दो वर्ष से श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण पर चल रहे वादों में वादकारियों ने कई बार अदालत में प्रार्थना पत्र दिए हैं। अदालत में ठाकुर केशवदेव पक्ष के वादकारी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी द्वारा 7 जनवरी 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन में प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसमें उन्होंने दावा किया कि ईदगाह पक्ष के लोग ईदगाह की दीवारों पर मौजूद उन साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। 

प्रार्थना पत्र में यह भी बताया गया कि ईदगाह की दीवारों पर कमल, ओम, स्वास्तिक और चक्र बने हुए हैं। ये वही चिह्न हैं जो कि ठाकुर केशवराय मंदिर की दीवारों पर थे। उन्होंने बताया कि 1862 से लेकर 1865 तक आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर एलेक्जेंडर कर्निंघम ने खुदाई भी कराई गई थी। जिसमें हिंदू विग्रह प्राप्त हुए हैं। उन्होंने मांग की थी इन सभी प्रतीकों के संरक्षण के लिए ईदगाह में सुरक्षा अधिकारी नामित किया जाए। 

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वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने बताया कि उनके द्वारा अदालत में इस प्रकार का प्रार्थना पत्र दिया गया था कि ईदगाह की दीवारों पर जो मंदिर के चिह्न मौजूद हैं, उन साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाया जाए। हमें इस बात की अनुमति दी जाए कि हम इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में प्रतिदिन ईदगाह में जा सकें।

विस्तार

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामले में हिंदू सेना के दावे पर अदालत ने ईदगाह का अमीन सर्वे करने का आदेश किया है। सिविल जज सीनियर डिवीजन-तृतीय सोनिका वर्मा की ओर से ईदगाह का अमीन निरीक्षण कर रिपोर्ट दिए जाने के आदेश के बाद सभी पक्ष अमीन रिपोर्ट व इसके बाद की तैयारियों में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि अमीन रिपोर्ट के समय ईदगाह में करीब 12 से अधिक लोग मौजूद रहेंगे। यह प्रक्रिया दो जनवरी को शीतकालीन अवकाश के बाद कोर्ट खुलने के बाद शुरू होगी।

 

वादी के अधिवक्ता शैलेष दुबे ने बताया कि न्यायालय के अमीन के मौके का निरीक्षण के समय वह खुद व उनके साथी अधिवक्ता संदीप शर्मा, वादीगण विष्णु गुप्ता और सुरजीत सिंह यादव को मौके पर रहने का अधिकार है। साथ ही जो चार प्रतिवादीगण हैं वह और उनका एक-एक अधिवक्ता भी चाहें तो अमीन निरीक्षण के समय मौके पर रह सकते हैं। 

दो जनवरी से शुरू हो सकती है प्रक्रिया 

विधि विशेषज्ञों के अनुसार दो जनवरी को अदालत खुलने के बाद अदालती प्रक्रिया के तहत अमीन खुद मौके पर जाएंगे। जाने से पहले वह वादी व उनके अधिवक्ता और उभय पक्ष को सूचित करेंगे। जिसके बाद ईदगाह में पहुंचकर निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करेंगे। मौके पर दोनों पक्षों की मौजूदगी के तौर पर साक्ष्य के तौर पर हस्ताक्षर भी कराएं जाएंगे। अमीन द्वारा विवादित स्थल की दिशा बताई जाएंगी कि वह किस दिशा में स्थित है और उसके अंदर प्रवेश करके बताया जाएगा कि स्थल के अंदर क्या-क्या निर्माण हैं। यदि वहां पर कोई विशेष निर्माण है तो उसका उल्लेख भी करना होगा।



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