अब्दुल्ला आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से झटका, FIR रद्द करने से इनकार

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे उस मामले को रद्द करने की मांग की थी, जो पासपोर्ट बनवाने के लिए कथित रूप से नकली दस्तावेज़ों के इस्तेमाल से जुड़ा है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 23 जुलाई के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे हैं। उच्च न्यायालय ने रामपुर में दर्ज मामले की कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध करने वाली खान की अर्जी खारिज कर दी थी और निचली अदालत को कानून के अनुसार मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था। उत्तर प्रदेश का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि मामले की पड़ताल पूरी हो चुकी है और अब दलीलें सुनने की तारीख तय की गई हैं।

पीठ ने खान का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कहा, ‘‘निचली अदालत को इसपर फैसला करने दीजिए। सुनवाई अदालत पर भरोसा रखें। उसको ही इसका फैसला करने दीजिए। इस चरण में हमें इसमें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए।’’ पीठ ने कहा कि सुनवाई अदालत उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से प्रभावित हुए बिना सभी मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया था कि मामले में प्राथमिकी जुलाई 2019 में दर्ज की गई थी और आरोप लगाया गया था कि खान ने जाली और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके पासपोर्ट हासिल किया था। प्राथमिकी में दावा किया गया है कि उच्च माध्यमिक कक्षा के प्रमाण-पत्र सहित खान की शैक्षिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक जनवरी 1993 है, जबकि उनके पासपोर्ट में यह 30 सितंबर 1990 बताई गई है।

अभियोजन पक्ष ने खान के खिलाफ कथित अपराधों में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना) और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12(1)(ए) के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया है।

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