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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत ताजमहल सहित सभी स्मारकों में प्रवेश शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इस कारण स्मारकों पर बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। रविवार को ताजमहल पर भीड़ नियंत्रण के इंतजाम पूरे तरह से फेल नजर आए। ताजमहल में पूर्वी और पश्चिमी गेट के टर्न स्टाइल गेटों के नीचे से प्रवेश दिया गया। यहां अंदर जाने के लिए छोटे गेट से एक पर्यटक को भेजा जा रहा है, जबकि प्रवेश के लिए कतारें दो से ढाई किलोमीटर तक लंबी थीं। नीम तिराहे से आगे तक दोपहर दो बजे कतार लगी हुई थीं।
उमस भरी गर्मी में दो से तीन घंटे तक सैलानियों की गोद में और नीचे खड़े बच्चों का बुरा हाल हो गया। कई बार वह भीड़ के दबाव में दबे और चीखने चिल्लाने लगे। यह स्थिति मुख्य गुंबद पर लगी कतार में भी देखने को मिली। कई बार बच्चे कुचलने से बचे। शाहगंज की सुमन का कहना था कि ताजमहल पर आकर पछताए। बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। अब कभी नहीं आएंगे।
बुजुर्ग सैलानी भी रहे परेशान
ताजमहल पर बुजुर्ग सैलानी भी बेहद परेशान नजर आए। दिल्ली से आए निरंजन सिंह का कहना था कि इतनी भीड़ होगी, यह नहीं सोचा था। लंबी कतार में सुबह से लगना पड़ा। बीपी की समस्या हो गई। इसी तरह अन्य बुजुर्ग सैलानी भी परेशान दिखे।
मुख्य मकबरे पर शू कवर के ढेर लगे
ताज के मुख्य मकबरे पर शू कवर के ढेर लग गए। सैलानियों ने यहां शू कवर डाल दिए। संगमरमर के फर्श पर नीले शू कवर ही बिछे नजर आए। भीड़ के कारण यहां भी इंतजाम फेल हो गए।
तीन किमी पैदल चलकर आए सैलानी
पश्चिमी गेट की पार्किंग दोपहर 12 बजे तक फुल हो गई। ऐसे में सैलानियों को तीन किलोमीटर तक पैदल चलकर ताजमहल के प्रवेश द्वार तक आना पड़ा। यहां लाइनों में लगने के लिए भी मारामारी मची हुई थी।
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