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खेत में उतरे डीएम, गेहूं काटकर फसल उपज का लिया जायजा, किसानों का बढ़ाया हौसला

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बाराबंकी। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी गुरुवार को तहसील नवाबगंज के ग्राम लक्षबर बजहा में एक अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने किसान की भूमिका निभाते हुए खेत में उतरकर खुद हंसिया से लहलहाती गेहूं की फसल की कटाई की और बाद में मड़ाई में भी हिस्सा लिया। डीएम को खेत में काम करते देख ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

डीएम शशांक त्रिपाठी किसान उदय नारायण के खेत में रबी सीजन की गेहूं फसल का आकलन करने पहुंचे थे। उनके साथ पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय, एसडीएम आनंद कुमार तिवारी, तहसीलदार भूपेंद्र विक्रम सिंह और जिला कृषि अधिकारी राजित राम सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

इस दौरान डीएम ने क्रॉप कटिंग प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया और बताया कि इसी माध्यम से फसल की औसत पैदावार का सही आकलन किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रॉप कटिंग के लिए खेतों का चयन रेंडम तरीके से किया जाता है, जिससे आंकड़े निष्पक्ष और विश्वसनीय रहें।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्रॉप कटिंग का कार्य पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाए, ताकि उत्पादन का सटीक आंकलन संभव हो सके। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल फसल उत्पादन का वास्तविक आकलन करती है, बल्कि फसल बीमा दावों के निस्तारण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारण और कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि क्रॉप कटिंग के आंकड़ों से विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादन की तुलना संभव होती है, जिससे किसानों को बेहतर मार्गदर्शन और उनकी आय बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलती है। अंत में डीएम ने जिले के अन्य गांवों में भी इस कार्य को पूरी सटीकता और पारदर्शिता के साथ कराने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी व पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने तहसील नवाबगंज क्षेत्र के ग्राम मेंहदीपुर मजरे हरख में पोस्ता व अफीम की खेती का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से सीधे संवाद किया और अफीम की खेती से होने वाले लाभ व चुनौतियों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान जिला अफीम अधिकारी ने बताया कि जनपद में वर्तमान में कुल 5038 किसान अफीम की खेती कर रहे हैं।

इनमें 4269 किसान सीपीएस पद्धति के अंतर्गत प्रति किसान लगभग 5 एयर भूमि पर खेती कर रहे हैं, जबकि 769 किसान पारंपरिक चीरा विधि से 1 एयर भूमि पर उत्पादन कर रहे हैं। डीएम ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने, उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। वहीं एसपी ने अफीम संग्रहण, भंडारण एवं अवशेष निस्तारण की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के निर्देश दिये।

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