लखनऊ : प्रदेश में गिरते तापमान से एक तरफ जनजीवन अस्त-व्यस्त है तो फसलों पर भी उतना ही खतरा मंडरा रहा है। आलू, टमाटर और मटर में पाला और झुलसा रोग की संभावना है तो सरसों, सब्जी, आम आदि में कीट-रोग लगने का खतरा है। ऐसे में किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र लखनऊ के अध्यक्ष/वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. अखिलेश कुमार दुबे ने पहले से बचाव के तरीके बताएं हैं।
उन्होंने बताया कि इस समय मौसम का रुख देखते हुए पाला और झुलसा रोग तेजी से फैलने की संभावना है। जिन किसानों ने आलू की सिंचाई नहीं की है, वह इस सप्ताह जरूर कर दें। खेतों में नमी आने से पाला का असर नहीं होगा। इसके अलावा आलू को पछेती झुलसा से बचाने के लिए कार्बेंडाजिम मेटालेक्जिल डेढ़ ग्राम प्रति लीटर पानी घोलकर (प्रति एकड़ 200 लीटर) छिड़काव और निगरानी करें। किसी तरह का लक्षण दिखने पर संबंधित जिलों के कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानियों से सलाह लेकर ही बचाव करें।
इसी तरह टमाटर को बचाने के लिए यह दोनों विधि अपनाएं। वहीं, मटर में उकठा बीमारी की संभावना है। एक-दो फूल दिखने पर ही हल्की सिंचाई करें। इसके अलावा डेढ़ से दो ग्राम सल्फर एक लीटर पानी (प्रति एकड़ 200 लीटर) घोल बनाकर छिड़काव करके बचाव करें।
डॉ. अखिलेश ने बताया कि मौसम को देखते हुए रबी की सभी फसलों को पाला से खतरा है। इसके बचाव के लिए किसानों ने जो भी फसलें की हैं उनकी सिंचाई जरूर करें। खेतों में नमी आने से पाला का प्रकोप नहीं पड़ेगा। खासकर किसान गेहूं की दूसरी सिंचाई जरूर कर दें। हर 20 दिन के अंतराल में पूरी अवधि तक पांच से छह सिंचाई गेहूं की करनी है। इससे पैदावार अच्छी होगी। आम के बागों में दो ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी में मिलाकर पेड़ों पर छिड़काव करें। साथ ही जालाकीट दिखने पर सिर्फ पानी से धुलाई करें।








