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इलाहाबाद हाईकोर्ट : बाहुबली मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों ने याचिका ली वापस, जानें क्या था पूरा मामला 

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अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:12 PM IST

सार

पिछले साल मुकदमे की सुनवाई के लिए आए मुख्तार अंसारी के पुत्र समेत कुछ लोगों को पुलिस ने शांति भंग के अंदेशे में कई घंटे तक थाने में हिरासत में लिया था। बाद में जमानत पर रिहा कर दिया था।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के बेटों उमर अंसारी और अब्बास अंसारी की सुरक्षा के लिए दाखिल याचिका अर्थहीन होने के आधार पर खारिज कर दी है लेकिन साथ ही कहा है कि अगर नया वाद कारण उत्पन्न होता है तो दोबारा याचिका दायर करने में यह आदेश आड़े नहीं आयेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व न्यायमूर्ति वीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है।

पिछले साल मुकदमे की सुनवाई के लिए आए मुख्तार अंसारी के पुत्र समेत कुछ लोगों को पुलिस ने शांति भंग के अंदेशे में कई घंटे तक थाने में हिरासत में लिया था। बाद में जमानत पर रिहा कर दिया था।

मुख्तार का मुकदमा गाजीपुर हो गया है ट्रांसफर

याची का कहना था कि बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह व विधायक सुशील सिंह के खिलाफ विशेष अदालत प्रयागराज में पैरवी के लिए आने में उन्हें खतरा है। उनकी व गवाहों की सुरक्षा की जाय और महानिदेशक जेल उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया जाय कि अभियुक्तों व गवाहों की पेशी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से की जाय।

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क्योंकि, प्रयागराज में चल रहा आपराधिक केस गाजीपुर की एमपीएमएलए विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है। ऐसे में अब उन्हें प्रयागराज में मुकदमे की पैरवी के लिए आना नहीं पड़ेगा। इस हालत में याचिका निरुद्देश्य हो गई है। याची अधिवक्ता उपेन्द्र उपाध्याय ने याचिका वापस लेने की प्रार्थना की जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका वापस करते हुए खारिज कर दी है।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के बेटों उमर अंसारी और अब्बास अंसारी की सुरक्षा के लिए दाखिल याचिका अर्थहीन होने के आधार पर खारिज कर दी है लेकिन साथ ही कहा है कि अगर नया वाद कारण उत्पन्न होता है तो दोबारा याचिका दायर करने में यह आदेश आड़े नहीं आयेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व न्यायमूर्ति वीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है।

पिछले साल मुकदमे की सुनवाई के लिए आए मुख्तार अंसारी के पुत्र समेत कुछ लोगों को पुलिस ने शांति भंग के अंदेशे में कई घंटे तक थाने में हिरासत में लिया था। बाद में जमानत पर रिहा कर दिया था।

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