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दीक्षांत समारोह: कानपुर आईआईटी की ब्लॉकचेन तकनीक से इग्नू में 60 हजार छात्रों को दी गईं डिग्रियां

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 03 May 2022 07:44 PM IST

सार

दीक्षांत समारोह में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में 60 हजार छात्रों को डिग्रियां बांटी गईं। कर्नाटक सरकार भी कानपुर आईआईटी द्वारा विकसित ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रही है।

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कानपुर आईआईटी द्वारा विकसित ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके हाल ही में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में हुए दीक्षांत समारोह में 60 हजार छात्रों को डिजिटल डिग्री दी गई। इससे पहले 24 जनवरी को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बच्चों को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से दिए थे।

इस तकनीक को संस्थान के स्टार्टअप क्रूबन ने नेशनल ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट ऑफ नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सी3आई के तहत प्रो. मणींद्र अग्रवाल व अन्य वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। टेक्नोलॉजी का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 दिसंबर 2021 को संस्थान के दीक्षांत समारोह में किया था।

कर्नाटक सरकार भी इस तकनीक का प्रयोग कर रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से भी इस तकनीक को लेकर समझौता हुआ है। सीएसजेएमयू भी जल्द ब्लॉकचेन पर आईआईटी के साथ करार करेगा। आईआईटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह संस्थान के लिए गर्व की बात है।

यह होती है ब्लॉकचेन तकनीक
डिजिटल युग में ब्लॉकचेन तकनीक ही सबसे सुरक्षित है। इसमें रखे सभी दस्तावेज हैकर से सुरक्षित रहते हैं। ब्लॉकचेन में रखे दस्तावेज को अगर कोई हैक कर लेता है तो उसे सही जानकारी नहीं मिलती क्योंकि उसमें शब्द लगातार परिवर्तित होते रहते हैं।

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विस्तार

कानपुर आईआईटी द्वारा विकसित ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके हाल ही में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में हुए दीक्षांत समारोह में 60 हजार छात्रों को डिजिटल डिग्री दी गई। इससे पहले 24 जनवरी को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बच्चों को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से दिए थे।

इस तकनीक को संस्थान के स्टार्टअप क्रूबन ने नेशनल ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट ऑफ नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सी3आई के तहत प्रो. मणींद्र अग्रवाल व अन्य वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। टेक्नोलॉजी का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 दिसंबर 2021 को संस्थान के दीक्षांत समारोह में किया था।

कर्नाटक सरकार भी इस तकनीक का प्रयोग कर रही है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) से भी इस तकनीक को लेकर समझौता हुआ है। सीएसजेएमयू भी जल्द ब्लॉकचेन पर आईआईटी के साथ करार करेगा। आईआईटी के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह संस्थान के लिए गर्व की बात है।

यह होती है ब्लॉकचेन तकनीक

डिजिटल युग में ब्लॉकचेन तकनीक ही सबसे सुरक्षित है। इसमें रखे सभी दस्तावेज हैकर से सुरक्षित रहते हैं। ब्लॉकचेन में रखे दस्तावेज को अगर कोई हैक कर लेता है तो उसे सही जानकारी नहीं मिलती क्योंकि उसमें शब्द लगातार परिवर्तित होते रहते हैं।

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