हाईकोर्ट : विवाहित पुत्री को आश्रित कोटे में नियुक्ति न देने का आदेश रद

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अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 12 May 2022 09:29 PM IST

सार

हाईकोर्ट ने कहा है कि पुत्री के विवाहित होने के आधार पर आश्रित की नियुक्ति करने से इंकार नहीं किया जा सकता। याची की मां विद्युत निगम में कार्यरत थी। उनकी मौत हो गई। याची का भाई अपनी पत्नी परिवार के साथ अलग रहता है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विद्युत निगम बरेली के अधिशासी अभियंता के विवाहिता पुत्री को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इंकार करने के आदेश को रद कर दिया है। याची की अर्जी पर मृतका के पुत्र को नोटिस जारी कर पक्षों को सुनकर तीन माह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। उन्नाव की अंकिता सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि पुत्री के विवाहित होने के आधार पर आश्रित की नियुक्ति करने से इंकार नहीं किया जा सकता। याची की मां विद्युत निगम में कार्यरत थी। उनकी मौत हो गई। याची का भाई अपनी पत्नी परिवार के साथ अलग रहता है। मां ने वसीयत कर सारी संपत्ति पुत्री को सौंप दी है। कोर्ट ने कहा कि विपक्षी पुत्र को भी सुनकर आदेश दें। याची वसीयत के साथ अर्जी दाखिल करें।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विद्युत निगम बरेली के अधिशासी अभियंता के विवाहिता पुत्री को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने से इंकार करने के आदेश को रद कर दिया है। याची की अर्जी पर मृतका के पुत्र को नोटिस जारी कर पक्षों को सुनकर तीन माह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। उन्नाव की अंकिता सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि पुत्री के विवाहित होने के आधार पर आश्रित की नियुक्ति करने से इंकार नहीं किया जा सकता। याची की मां विद्युत निगम में कार्यरत थी। उनकी मौत हो गई। याची का भाई अपनी पत्नी परिवार के साथ अलग रहता है। मां ने वसीयत कर सारी संपत्ति पुत्री को सौंप दी है। कोर्ट ने कहा कि विपक्षी पुत्र को भी सुनकर आदेश दें। याची वसीयत के साथ अर्जी दाखिल करें।

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