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जगेथा की अस्थायी गोशाला का निरीक्षण करते नोडल अधिकारी। संवाद
– फोटो : UNNAO
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उन्नाव। गोशालाओं में मवेशियों की उपेक्षा से आहत गोसेवक के आत्मदाह का प्रयास करने के बाद बुधवार को दूसरे दिन जिले नोडल अधिकारी दौरे पर पहुंचे। उन्होंने तीन गो आश्रयस्थलों को देखा और सब ठीक मिला। बड़ी बात यह कि नोडल अधिकारी ने वही देखा जो जिले के अफसरों ने उन्हें दिखाना चाहा। वापस जाते समय उन्होंने गोशालाओं में व्यवस्था को ठीक बताया।
जिले के नोडल अधिकारी व बाल विकास पुष्टाहार के विशेष सचिव डॉ. अशोक चंद्र ने बुधवार को बिछिया के जगेथा गांव की अस्थायी गोशाला का निरीक्षण किया। हालांकि निरीक्षण से पहले ही यहां व्यवस्था दुरुस्त करा ली गई थी। सचिव ने मवेशियों के चारे-पानी की व्यवस्था देखी। गोशाला में 81 मवेशी मिले। हरे चारे के लिए बरसीम बोई गई थी।
मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए तिरपाल लगा था। उन्होंने दुधारू गाय को ब्रेड व गुड़ खिलाया। यहां पर सीडीओ दिव्यांशु पटेल, डीपीआरओ निरीश चंद्र साहू, बीडीओ अमित शुक्ला, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्पराज व डॉ. विकास गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद सचिव नवाबगंज टोल प्लाजा के पास स्थित कान्हा गोशाला पहुंचे। पशु चिकित्सक डॉ. राजेश मौर्य ने यहां 165 पशु संरक्षित होने की जानकारी दी। पंचायत सचिव दीपक मिश्रा ने निजी संसाधनों से चारे की व्यवस्था कराने की बात कही। 20 मिनट रुकने के बाद वह नोडल अधिकारी लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले सचिव ने शुक्लागंज में भी कान्हा गोशाला का निरीक्षण किया और सब ठीक कहकर लौट गए।
गौरतलब है कि आत्मदाह का प्रयास करने वाले अखिलेश ने कांशीराम कालोनी स्थित जिस गोशाला में छह मवेशियों की मौत होेने का वीडियो वायरल किया था। वहां का नोडल अधिकारी ने रुख ही नहीं किया। इसके अलावा प्लाट में मवेशियों के बंद होने की बात भी कही थी। वहां भी नोडल अफसर नहीं गए।
सीवीओ ने गोशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त होने का किया दावा
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में विशेष सचिव डॉ. अशोक चंद्र ने अधिकारियों के साथ बैठक की। गोवंश संरक्षण एवं भरण पोषण पर चर्चा करने के दौरान सीवीओ डॉ. पीके सिंह ने सचिव को बताया कि गोशाला में मवेशियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं है। ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाया जा रहा है। भूसा चारा पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। दावा किया कि सभी गोवंश स्वस्थ हैं। प्रत्येक 25 गोवंश पर एक केयर टेकर लगाया गया है।
अवैध आश्रय स्थल की जांच शुरू, प्लाट मालिक को नोटिस
उन्नाव। शहर से करीब छह किमी दूर 77 बीघा के प्लाट में करीब तीन हजार मवेशियों को किसने रखा, इसकी जांच शुरू हो गई है। गो सेवक अखिलेश अवस्थी ने 30 जनवरी को जिले के अधिकारियों से यहां की दुर्दशा की शिकायत की थी। सीडीओ की चिट्ठी पर एसडीएम सदर ने इसकी जांच की और प्लाट मालिक का पता लगाकर नोटिस भेजा है।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर दही चौकी के पास स्थित 77 बीघा क्षेत्रफल के प्लाट में चारों तरफ चहारदीवारी है। करीब 20 दिनों में शहर और आसपास के गांवों में घूम रहे छुट्टा मवेशियों को अज्ञात लोग बंद कर रहे हैं। यहां 3000 से ज्यादा मवेशी बंद किए गए हैं। मंगलवार को अखिलेश अवस्थी के खुद को आग लगाने की घटना के बाद सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने एसडीएम को इस प्राइवेट स्थल की पूरी पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा था। एसडीएम सदर सत्यप्रिय सिंह ने जांच की।
पता चला कि प्लाट कानपुर के नयागंज निवासी किसी पंकज का है। उनकी कई फर्में हैं। हालांकि देखभाल कर रहे लोग यह नहीं बता पाए कि मवेशी किसके कहने पर यहां रखे गए हैं। एसडीएम ने बताया कि प्लाट मालिक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। तीन दिन में जवाब न मिलने पर प्लाट मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गोसेवक ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
उन्नाव। गोशालाओं में मवेशियों के रखरखाव की उपेक्षा से आहत होकर मंगलवार को कलक्ट्रेट के बाहर खुद को आग लगाने वाले गोसेवक ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। बताया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जगाने के लिए आत्मदाह का प्रयास किया था।
कानपुर में एक नर्सिंगहोम में भर्ती गोसेवक अखिलेश अवस्थी की हालत में कुछ सुधार है। उन्होंने कहा कि बेजुबानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर उन्हें आत्मिक कष्ट है।
बताया कि 16 फरवरी के बाद वह गो आश्रय स्थलों और अस्थायी आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की समुचित देखभाल और भरण-पोषण की मांग को लेकर आमरण अनशन करेंगे। बताया कि दस साल पहले गो सेवा का संकल्प लेकर प्रयास शुरू किए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनी और गोवशों को संरक्षित करने की योजना लागू की तो उन्हें संतोष मिला। लेकिन गोशालाओं में तड़प-तड़प कर मर रहे मवेशियों को वह अब देख नहीं पा रहे हैं। गोशालाओं की दुर्दशा को लेकर रोज दो-चार वीडियो और फोटो आ जाते हैं, इससे उनका मन व्यथित है।
उन्नाव। गोशालाओं में मवेशियों की उपेक्षा से आहत गोसेवक के आत्मदाह का प्रयास करने के बाद बुधवार को दूसरे दिन जिले नोडल अधिकारी दौरे पर पहुंचे। उन्होंने तीन गो आश्रयस्थलों को देखा और सब ठीक मिला। बड़ी बात यह कि नोडल अधिकारी ने वही देखा जो जिले के अफसरों ने उन्हें दिखाना चाहा। वापस जाते समय उन्होंने गोशालाओं में व्यवस्था को ठीक बताया।
जिले के नोडल अधिकारी व बाल विकास पुष्टाहार के विशेष सचिव डॉ. अशोक चंद्र ने बुधवार को बिछिया के जगेथा गांव की अस्थायी गोशाला का निरीक्षण किया। हालांकि निरीक्षण से पहले ही यहां व्यवस्था दुरुस्त करा ली गई थी। सचिव ने मवेशियों के चारे-पानी की व्यवस्था देखी। गोशाला में 81 मवेशी मिले। हरे चारे के लिए बरसीम बोई गई थी।
मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए तिरपाल लगा था। उन्होंने दुधारू गाय को ब्रेड व गुड़ खिलाया। यहां पर सीडीओ दिव्यांशु पटेल, डीपीआरओ निरीश चंद्र साहू, बीडीओ अमित शुक्ला, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्पराज व डॉ. विकास गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद सचिव नवाबगंज टोल प्लाजा के पास स्थित कान्हा गोशाला पहुंचे। पशु चिकित्सक डॉ. राजेश मौर्य ने यहां 165 पशु संरक्षित होने की जानकारी दी। पंचायत सचिव दीपक मिश्रा ने निजी संसाधनों से चारे की व्यवस्था कराने की बात कही। 20 मिनट रुकने के बाद वह नोडल अधिकारी लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले सचिव ने शुक्लागंज में भी कान्हा गोशाला का निरीक्षण किया और सब ठीक कहकर लौट गए।
गौरतलब है कि आत्मदाह का प्रयास करने वाले अखिलेश ने कांशीराम कालोनी स्थित जिस गोशाला में छह मवेशियों की मौत होेने का वीडियो वायरल किया था। वहां का नोडल अधिकारी ने रुख ही नहीं किया। इसके अलावा प्लाट में मवेशियों के बंद होने की बात भी कही थी। वहां भी नोडल अफसर नहीं गए।
सीवीओ ने गोशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त होने का किया दावा
पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में विशेष सचिव डॉ. अशोक चंद्र ने अधिकारियों के साथ बैठक की। गोवंश संरक्षण एवं भरण पोषण पर चर्चा करने के दौरान सीवीओ डॉ. पीके सिंह ने सचिव को बताया कि गोशाला में मवेशियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं है। ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाया जा रहा है। भूसा चारा पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। दावा किया कि सभी गोवंश स्वस्थ हैं। प्रत्येक 25 गोवंश पर एक केयर टेकर लगाया गया है।
अवैध आश्रय स्थल की जांच शुरू, प्लाट मालिक को नोटिस
उन्नाव। शहर से करीब छह किमी दूर 77 बीघा के प्लाट में करीब तीन हजार मवेशियों को किसने रखा, इसकी जांच शुरू हो गई है। गो सेवक अखिलेश अवस्थी ने 30 जनवरी को जिले के अधिकारियों से यहां की दुर्दशा की शिकायत की थी। सीडीओ की चिट्ठी पर एसडीएम सदर ने इसकी जांच की और प्लाट मालिक का पता लगाकर नोटिस भेजा है।
लखनऊ-कानपुर हाईवे पर दही चौकी के पास स्थित 77 बीघा क्षेत्रफल के प्लाट में चारों तरफ चहारदीवारी है। करीब 20 दिनों में शहर और आसपास के गांवों में घूम रहे छुट्टा मवेशियों को अज्ञात लोग बंद कर रहे हैं। यहां 3000 से ज्यादा मवेशी बंद किए गए हैं। मंगलवार को अखिलेश अवस्थी के खुद को आग लगाने की घटना के बाद सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने एसडीएम को इस प्राइवेट स्थल की पूरी पड़ताल कर रिपोर्ट देने को कहा था। एसडीएम सदर सत्यप्रिय सिंह ने जांच की।
पता चला कि प्लाट कानपुर के नयागंज निवासी किसी पंकज का है। उनकी कई फर्में हैं। हालांकि देखभाल कर रहे लोग यह नहीं बता पाए कि मवेशी किसके कहने पर यहां रखे गए हैं। एसडीएम ने बताया कि प्लाट मालिक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। तीन दिन में जवाब न मिलने पर प्लाट मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गोसेवक ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
उन्नाव। गोशालाओं में मवेशियों के रखरखाव की उपेक्षा से आहत होकर मंगलवार को कलक्ट्रेट के बाहर खुद को आग लगाने वाले गोसेवक ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है। बताया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जगाने के लिए आत्मदाह का प्रयास किया था।
कानपुर में एक नर्सिंगहोम में भर्ती गोसेवक अखिलेश अवस्थी की हालत में कुछ सुधार है। उन्होंने कहा कि बेजुबानों पर हो रहे अत्याचार को लेकर उन्हें आत्मिक कष्ट है।
बताया कि 16 फरवरी के बाद वह गो आश्रय स्थलों और अस्थायी आश्रय स्थलों में रखे गए पशुओं की समुचित देखभाल और भरण-पोषण की मांग को लेकर आमरण अनशन करेंगे। बताया कि दस साल पहले गो सेवा का संकल्प लेकर प्रयास शुरू किए थे। प्रदेश में भाजपा सरकार बनी और गोवशों को संरक्षित करने की योजना लागू की तो उन्हें संतोष मिला। लेकिन गोशालाओं में तड़प-तड़प कर मर रहे मवेशियों को वह अब देख नहीं पा रहे हैं। गोशालाओं की दुर्दशा को लेकर रोज दो-चार वीडियो और फोटो आ जाते हैं, इससे उनका मन व्यथित है।
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