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पालने में आई बेटी पालकी में होगी विदा: जन्म के बाद अपनों ने छोड़ा, वात्सल्य ग्राम में पली-बढ़ी, अधिवक्ता बनी

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पालने में आई बेटी अब पालकी में विदा होगी। वात्सल्य ग्राम में पली-बढ़ी रिचा की 20 फरवरी को शादी है। वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में उसके विवाह की तैयारियां जोरों पर हैं। एलएलएम कर चुकी रिचा की कहानी दिल को छू लेने वाली है। समाज के उन लोगों के लिए संदेश भी, जो बेटियों को बोझ समझते हैं। जन्म के एक दिन बाद ही उसे अपनों ने छोड़ दिया था। वात्सल्य ग्राम में रिचा को मातृत्व की छांव मिली। पढ़-लिखकर अधिवक्ता बनी। अब उसकी शादी प्रतिष्ठित परिवार में होने जा रही है।  

साध्वी ऋतंभरा वृंदावन के वात्सल्य ग्राम आश्रम से पूर्व दिल्ली वात्सल्य प्रकल्प चलाती थीं। दिल्ली में ही रिचा उनको एक दिन की अवस्था में मिली थी। उसका पालन पोषण दिल्ली में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा भी दिल्ली में हुई, उसके बाद उसने समविद गुरुकुलम वृंदावन में शिक्षा प्राप्त की और वनस्थली विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से एलएलएम किया। वर्तमान में रिचा ऑल इंडिया बार एसोसिएशन की मेंबर बनने के बाद दिल्ली में प्रैक्टिस कर रही है।

वात्सल्य ग्राम की अधिष्ठात्री साध्वी ऋतंभरा द्वारा संचालित परम शक्ति पीठ के सेवा प्रकल्प वात्सल्य ग्राम के तहत नानी, मौसी व यशोदा मां सुमन परमानंद की छत्रछाया में पली-पढ़ी रिचा परमानंद के हाथ पीले करने का समय आ गया है। रिचा की शादी इंजीनियर से तय हुई है। 

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वात्सल्य ग्राम के मीडिया प्रभारी उमाशंकर राही ने बताया कि वात्सल्य ग्राम में 22 परिवार हैं। प्रत्येक परिवार में नानी, मौसी और मां के भाव संबंधों को स्थापित कर बच्चों का लालन-पालन हो रहा है। रिचा परमानंद सुमन परमानंद की सातवीं बेटी है, जिसका विवाह हो रहा है। इससे पूर्व एक बेटा और छह बेटियों का विवाह समाज के प्रतिष्ठित परिवारों में हो चुका है। 

अधिवक्ता रिचा का विवाह इंदौर के राजेंद्र चौहान के बेटे अर्पित से होने जा रहा है। अर्पित कंप्यूटर साइंस से इंजीनियर हैं और वह वर्तमान में सीमेंस कंपनी पुणे में उच्च पद पर कार्यरत हैं। अर्पित की मां अनीता ने 20 वर्ष पूर्व दीदी मां की इंदौर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में संकल्प लिया था कि मैं बेटे का विवाह वात्सल्य ग्राम की बेटी के साथ करूंगी। 

रिचा की वैवाहिक तैयारियां जोरों पर हैं। हिंदू रीति-रिवाजों के साथ नानी, मौसी द्वारा गाए जा रहे मंगल गीतों के मध्य मेहंदी, हल्दी की रस्म हो चुकी है। मंडप और विवाह 20 फरवरी को वात्सल्य ग्राम के प्रांगण में समस्त हिंदू रीति-रिवाजों के साथ वैदिक मंत्रों द्वारा संपूर्ण होगा। विवाह में गणमान्य नागरिक, विद्वान जन, संतों, महंतों महामंडलेश्वरों शासनिक, प्रशासनिक लोगों को आमंत्रण भेजा गया है। 

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