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लखनऊ से कानपुर का सफर होगा आसान, दो नए ब्रिज के निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी

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लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी परियोजना को मंजूरी दी है। कैबिनेट की बैठक में सरसैया घाट से शुक्लागंज (उन्नाव) के बीच लगभग 4200 मीटर लंबाई के दो-दो लेन वाले दो नए ब्रिज बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृत दी गई है। इस परियोजना की कुल लागत करीब 753.13 करोड़ रुपये है, जिससे निर्माण कार्य के लिए 460 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की निगरानी में पूरी की जाएगी। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पुल निगम को सौंपी गई है और इसे 36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

खबर के मुताबिक, ब्रिज बनने के बाद कानपुर नगर की वीवीआईपी रोड सीधे ट्रांसगंगा सिटी से जुड़ जाएगी। इससे अभी लगभग 14 किलोमीटर की दूरी करीब 4 किलोमीटर रह जाएगी और गंगा बैराज पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी लोगों को राहत मिलेगी। शुरुआत में यहां चार लेन का एक पुल बनाने की योजना थी, लेकिन शहर में जहां पुल उतरता वहां भारी ट्रैफिक जाम की धमकी को देखते हुए अब दो-दो लेन के दो अलग सेतुओं के निर्माण का फैसला लिया गया है। इन सेतुओं को रानीघाट और घोवीघाट के पास जोड़ा जाएगा, जिससे जाजमऊ पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। भविष्य में इन पुलों को गंगा रिवर फ्रंट से जोड़ने की भी योजना है।

कैबिनेट ने मेरठ में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। करीब 200 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बनने वाले इस क्लस्टर के लिए 213.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह परियोजना अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत विकसित की जाएगी और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।

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कैबिनेट ने विदेशी निवेश और तुरंत निवेश प्रोत्साहन नीति के तहत 82.65 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। जागरण की खबर के मुताबिक, इसके तहत TI मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड को मेडिकल डिवाइस पार्क में निवेश पर 14.77 करोड़ रुपये, विजन सोर्स LLP को 65.35 करोड़ रुपये और यूनिलीवर इंडिया लिमिटेड को जीएसटी के रूप में 2.53 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जाएगी।

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य और जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद (प्रथम संशोधन) नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद के गैर-सरकारी सदस्यों को डीएम द्वारा नामित किया जाएगा।

सरकार ने शहरी निकायों और विकास प्राधिकरणों को दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क से मिलने वाली सब्सिडी को अब तिमाही के बजाय निकायों किस्तों में जारी करने का फैसला किया है। इससे नगर निगमों, नगर पालिकाओं और विकास प्राधिकरणों को 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जल्द उपलब्ध हो जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विकास कार्यों को तेजी से मिलेगी।

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