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हाईकोर्ट ने कहा : जेलों की दशा सुधारने में गंभीर नहीं है सरकार, अगली सुनवाई पर मौजूद रहें मुख्य सचिव

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों की दशा सुधारने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सरकार की तरफ  से पक्ष न रखकर सुनवाई टालने के अनुरोध को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिखाई दे रही। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 27 सितंबर को महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने के लिए बुलाया और कहा है कि मुख्य सचिव सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें।

कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर की खंडपीठ ने बच्चे लाल की जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही अपर शासकीय अधिवक्ता जय नारायण ने कोर्ट से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। कहा, जिन्हें बहस करनी है, उनमें से कोई सरकारी अधिवक्ता कोर्ट में उपस्थित नहीं है। इसलिए सुनवाई आज के लिए टाल दी जाय। इसे कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई पर महाधिवक्ता और मुख्य सचिव को उपस्थित रहने को कहा है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों की दशा सुधारने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सरकार की तरफ  से पक्ष न रखकर सुनवाई टालने के अनुरोध को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिखाई दे रही। कोर्ट ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 27 सितंबर को महाधिवक्ता को सरकार का पक्ष रखने के लिए बुलाया और कहा है कि मुख्य सचिव सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें।

कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर की खंडपीठ ने बच्चे लाल की जनहित याचिका सहित अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है।

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