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लखनऊ विश्वविद्यालय में पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस से धक्का-मुक्की

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लखनऊ। पेपर लीक के मुद्दे पर सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय का माहौल उस समय गर्मा गया, जब प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर से बाहर निकलने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके चलते हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

​प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद डिंपल यादव और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विपक्ष पेपर लीक के मुद्दे पर केवल चुनिंदा राज्यों में ही आवाज उठाता है, जबकि गैर-एनडीए सरकारों वाले राज्यों में सामने आए मामलों पर चुप्पी साध लेता है।

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन समाप्त होने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बाद अब पेपर लीक का मुद्दा नई राजनीतिक दिशा में बढ़ता दिख रहा है। इसी क्रम में छात्रों के समूह ने गैर-भाजपा शासित राज्यों में कथित पेपर लीक मामलों को लेकर विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पंजाब, कर्नाटक और भी कई सारे राज्य हैं जहां पेपर लीक हो रहा है, तो अब वहां भी इस्तीफे होने चाहिए क्योंकि तभी न्याय होगा; नहीं तो विपक्ष न्याय की बात करना छोड़ दे।

दोपहर करीब 12 बजे बड़ी संख्या में छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 (आजाद द्वार) पर एकत्र हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ प्रदर्शनकारी परिसर से बाहर निकलकर मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन पहले से तैनात पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया।

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​इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की भी कोशिश की, हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय परिसर के भीतर ही रोक दिया।

प्रदर्शन में शामिल छात्र आलोक मिश्रा ने कहा कि जिन राज्यों में कथित तौर पर पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, वहां के शिक्षा मंत्रियों को भी जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि विपक्ष यदि छात्रों के हितों की बात करता है तो उसे सभी राज्यों के मामलों पर समान रूप से आवाज उठानी चाहिए।

छात्र जतिन शुक्ला ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक दलों का रुख निष्पक्ष होना चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी राज्य में ऐसी घटना होती है तो उस पर समान रूप से प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।

​वहीं छात्र अनुरान ने भी कहा कि विपक्ष को गैर-एनडीए शासित राज्यों में सामने आने वाले पेपर लीक मामलों पर भी उतनी ही गंभीरता दिखानी चाहिए, जितनी अन्य राज्यों के मामलों में दिखाई जाती है।

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