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जिसे गांव वाले भगवान गणेश मानकर करते थे पूजा, केजीएमयू के डॉक्टरों ने उसे बनाया सुंदर

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अक्षत टाइम्स संवाददाता, लखनऊ, 09 नवम्बर। लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के चिकित्सकों ने एक दुर्लभ सर्जरी के जरिये कुशीनगर जिले के 14 वर्षीय बालक गणेश का चेहरा सुंदर बना दिया है। इस बच्चे को उसके जन्मजात चेहरे की विकृति के कारण गाँव के लोग वर्षों तक श्भगवान गणेशश् का अवतार मानकर पूजा करते रहे।

प्राप्त जानकारी जन्म के समय गणेश के नाक की जड़ से एक बड़ा उभार (सूजन) बाहर निकला हुआ था। डॉक्टरों ने प्रारम्भ में जांच कराने की सलाह दी थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसे चमत्कार समझ पूजा आरम्भ कर दी। 12 वर्षों तक परिवार ने किसी चिकित्सा उपचार की पहल नहीं की। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, सूजन का आकार भी बढ़ता गया, जिससे सांस लेने और सामाजिक रूप से रहने में कठिनाई होने लगी। इसके बाद गणेश के पिता रमेश ने उसे केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में दिखाया। जांच के बाद चिकित्सकों ने बच्चे में नैसो-एथमॉयडल एन्सेफैलोसील विद हाइपरटेलोरिज्म नामक दुर्लभ जन्मजात रोग की पुष्टि की, जिसमें मस्तिष्क का भाग खोपड़ी की अस्थि में दोष के कारण बाहर निकल आता है।

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प्रो. (डॉ.) बृजेश मिश्रा (प्लास्टिक सर्जरी) और प्रो. (डॉ.) सोमिल जायसवाल (न्यूरोसर्जरी) के नेतृत्व में दोनों विभागों की टीम ने लगभग आठ घंटे लंबी जटिल सर्जरी की। पहले न्यूरोसर्जरी टीम ने क्रैनियोटॉमी कर मस्तिष्क के बाहर निकले भाग को सुरक्षित रूप से अलग किया, उसके बाद प्लास्टिक सर्जरी टीम ने नाक एवं माथे की अस्थियों को पुनः आकार देकर चेहरे का पुनर्निर्माण किया।

सर्जरी टीम में डॉ. रवि कुमार, डॉ. बी. गौतम रेड्डी, तथा सीनियर रेजिडेंट्स डॉ. गौरव जैन, डॉ. अजहर फैयाज, डॉ. साक्षी भट्ट, डॉ. रुचा यादव, डॉ. अंचल अग्रवाल और डॉ. आकांक्षा मेहरा शामिल रहे। न्यूरोसर्जरी टीम में डॉ. विष्णु वर्धन, डॉ. शुभ्रित त्यागी और डॉ. शुभम कौशल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. तनमय तिवारी ने किया, जिनके साथ डॉ. आमना खातून, डॉ. शंभवी झा, डॉ. छवि कारा, डॉ. ओबिली मनोज और डॉ. आयुषी माथुर रहीं। ओटी संचालन की जिम्मेदारी सिस्टर इंचार्ज सरिता के पास थी। सर्जरी के बाद गणेश अब स्वस्थ हैं।

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