– विरोध प्रदर्शन कर संशोधन की उठाई माँग
– प्रथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षामंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा
– धरने में शिक्षकों का छलका दर्द, कहा जब भर्ती हुए थे तब नहीं था टेट, अब क्यों की जा रही अनिवार्यता
अक्षत टाइम्स संवाददाता, उन्नाव, 16 सितम्बर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के आह्वान पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ उन्नाव के जिलाध्यक्ष एवम् प्रांतीय मन्त्री बृजेश पाण्डेय एवम् जिला महामंत्री गजेन्द्र वर्मा, जिला कोषाध्यक्ष विनोद तिवारी एवम् वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सिंह के नेतृत्व में मंगलवार को जिलेभर के भारी संख्या में शिक्षकों ने निराला उद्यान पार्क में उपस्थित होकर विशाल धरना प्रदर्शन कर सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के फैसले का विरोध कर जोरदार प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अगले दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा नौकरी छोड़नी पड़ सकती है।
इस आदेश से देशभर के लगभग 40 लाख और उत्तर प्रदेश के करीब चार लाख परिवार प्रभावित होंगे। इस फैसले से असंतुष्ट शिक्षकों ने विरोध तेज कर दिया है। जिसके तहत हजारों आक्रोशित शिक्षकों ने धरने के दौरान भयंकर नारेबाजी कर काला कानून वापस लो के नारे लगाकर टीईटी अनिवार्यता के आदेश को वापस लेने की केंद्र सरकार से माँग की। जिसको लेकर धरना प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री और शिक्षामंत्री भारत सरकार को सम्बोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ उन्नाव के जिलाध्यक्ष एवम् प्रांतीय मन्त्री बृजेश कुमार पाण्डेय ने उपस्थित शिक्षकों एवम् पदाधिकारियों के भारी हुजूम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 29 जुलाई 2011 से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य की थी। उससे पहले तैनात शिक्षकों के लिए यह नियम लागू नहीं था। इसलिए 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान करने हेतु संसद में संशोधन कर आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को इससे मुक्त किया जाना चाहिए। अनेक शिक्षक जिनकी आयु पचास से पचपन वर्ष के बीच है वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझते हुए भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में उनसे दोबारा पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा देने की अपेक्षा अव्यावहारिक है।


जिलामंत्री गजेन्द्र वर्मा ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक भी शिक्षक सशंकित न हो। ज्ञापन के माध्यम से समस्या के निराकरण हेतु सरकार से अनुरोध किया गया है। यदि शीघ्र ही समाधान न हुआ तो संगठन आर पार की लड़ाई सड़क से संसद तक करने को तैयार हैं। लखनऊ से दिल्ली तक हर स्तर पर संघर्ष का आगाज होगा। शिक्षक समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरना प्रदर्शन के बाद जिलाध्यक्ष बृजेश पाण्डेय के नेतृत्व में हजारों शिक्षकों का यह हुजूम टीईटी अनिवार्यता के आदेश के विरोध में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुँचा और जबरदस्त आक्रोश और नारेबाजी करते हुए माननीय प्रधानमंत्री और शिक्षामंत्री भारत सरकार को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।


विशाल धरना प्रदर्शन में संघर्ष समिति जिलाध्यक्ष डॉ रचना सिंह, जिला उपाध्यक्ष सूर्यकांत सिंह, उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश द्विवेदी, जिला मीडिया प्रभारी मदन पाण्डेय, जिला उपाध्यक्ष प्रत्यूष मिश्र, ब्लॉक अध्यक्ष सुमेरपुर विनोद सिंह, बीघापुर विश्वनाथ सिंह, औरास शशांक भूषण तिवारी, बिछिया कन्हैयालाल, गंजमुरादाबाद अजय कटियार, असोहा संदीप द्विवेदी, हिलौली विकास सिंह, मियागंज अविनाश तिवारी, कर्ण अभिषेक मिश्र, सरोसी प्रदीप द्विवेदी, तहसील प्रभारी पुरवा शिवम चौरसिया, संघर्ष समिति सुमेरपुर अध्यक्ष देश दीपक पाण्डेय, मंत्री सुमेरपुर वरुण मिश्रा, एफ चौरासी रज्जू प्रसाद, प्रशांत शुक्ला, महेन्द्र प्रताप सिंह, मणि शंकर तिवारी, अरुणेन्द्र प्रताप सिंह, अखण्ड प्रताप सिंह, रामदेव यादव, अरविंद सिंह, आशुतोष त्रिपाठी, संदीप शुक्ल, श्यामू चौरसिया, महेंद्र समेत संगठन के पदाधिकारियों सहित भारी संख्या में शिक्षक शिक्षिकाएँ मौजूद रहे।








