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UP News: प्रधानाध्यापकों को देना होगा जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ाई न होने का प्रमाण पत्र

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प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Social Media

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विभिन्न जिलों में जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों में रोक के बावजूद कक्षाएं चलाने की शिकायतों पर बेसिक शिक्षा विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी बीएसए को प्रधानाध्यापकों से यह प्रमाण पत्र मांगने के निर्देश दिए हैं कि उनके यहां चिह्नित जर्जर विद्यालय भवनों में पढ़ाई नहीं हो रही।

प्रधानाध्यापकों से प्रमाणपत्र लेने के बाद सभी बीएसए व जिला समन्वयक (निर्माण) को संयुक्त रूप से जिले में जर्जर भवनों में स्कूल का संचालन न होने का प्रमाणपत्र राज्य परियोजना कार्यालय को भी भेजना होगा।

उन्होंने सभी बीएसए को निर्देश दिए हैं कि तकनीकी समिति के स्थलीय निरीक्षण व मूल्यांकन के बाद भवन की मरम्मत या नियमानुसार नीलामी, ध्वस्तीकरण या फिर पुनर्निर्माण होने तक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था किसी अन्य सुरक्षित भवन या स्थान पर की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए हैं कि चिह्नित जर्जर सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक से इस आशय का प्रमाण पत्र लिया जाए कि कि जर्जर ढांचों में पढ़ाई व आवागमन रोक दिया गया है और पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था सुरक्षित भवन, स्थान में कर दी गई है। विद्यालयों से संकलित प्रमाणपत्र के आधार पर जिले स्तर से एक समेकित प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर राज्य परियोजना कार्यालय को दिनांक 10 नवंबर तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा।

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विभिन्न जिलों में जर्जर परिषदीय स्कूल भवनों में रोक के बावजूद कक्षाएं चलाने की शिकायतों पर बेसिक शिक्षा विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी बीएसए को प्रधानाध्यापकों से यह प्रमाण पत्र मांगने के निर्देश दिए हैं कि उनके यहां चिह्नित जर्जर विद्यालय भवनों में पढ़ाई नहीं हो रही।

प्रधानाध्यापकों से प्रमाणपत्र लेने के बाद सभी बीएसए व जिला समन्वयक (निर्माण) को संयुक्त रूप से जिले में जर्जर भवनों में स्कूल का संचालन न होने का प्रमाणपत्र राज्य परियोजना कार्यालय को भी भेजना होगा।

उन्होंने सभी बीएसए को निर्देश दिए हैं कि तकनीकी समिति के स्थलीय निरीक्षण व मूल्यांकन के बाद भवन की मरम्मत या नियमानुसार नीलामी, ध्वस्तीकरण या फिर पुनर्निर्माण होने तक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था किसी अन्य सुरक्षित भवन या स्थान पर की जाए।

उन्होंने निर्देश दिए हैं कि चिह्नित जर्जर सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक से इस आशय का प्रमाण पत्र लिया जाए कि कि जर्जर ढांचों में पढ़ाई व आवागमन रोक दिया गया है और पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था सुरक्षित भवन, स्थान में कर दी गई है। विद्यालयों से संकलित प्रमाणपत्र के आधार पर जिले स्तर से एक समेकित प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर राज्य परियोजना कार्यालय को दिनांक 10 नवंबर तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा।



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