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UP News: अवैध पार्किंग के खेल पर लगेगी लगाम, बड़े शहरों में पार्किंग के लिए एक समान होंगे नियम और शुल्क

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प्रदेश के बड़े शहरों में नगर निकाय अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी से चल रहे अवैध पार्किंग का खेल बंद किया जाएगा। नगर निगम वाले सभी 17 बड़े शहरों में पार्किंग को व्यवस्थित करने और एक समान शुल्क वसूली के लिए प्रस्तावित नियमावली लागू करने की तैयारी है। नगर विकास विभाग इस नियमावली का परीक्षण कर रहा है। इसके लागू होने से अवैध पार्किंग का धंधा बंद होगा और लोगों से अनाप-शनाप शुल्क की वसूली पर भी रोक लगेगी।

दरअसल सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध पार्किंग का खेल चलता है। जहां अक्सर जाम लगते हैं, वहां निकाय अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार अवैध पार्किंग बनाकर 10 से 30 रुपये तक की शुल्क की वसूली करते हैं। वहीं कई स्थानों पर नगर निकाय के संबंधित अधिकारी ही पार्किंग बनाकर वसूली शुरू कर देते हैं तो कई स्थानों पर दबंग अवैध पार्किंग बनाकर वाहनों को खड़ा कराने लगते हैं। इससे कई बार मारपीट जैसी स्थिति भी बन जाती है और बेतरतीब तरीके से वाहनों की पार्किंग कराने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

इन स्थितियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहरों की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही वाहनों की पार्किंग व्यवस्थित करने और एक समान शुल्क निर्धारित करने का निर्देश दे रखा है। इसी कड़ी में उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने सरकार को पार्किंग के लिए एक समान नियम व शुल्क तय करते हुए उप्र नगर निगम (पार्किंग स्थलों का निर्माण, संधारण एवं संचालन) नियमावली को लागू करने का सुझाव दिया है। पर, यह अब तक लागू नहीं हो सकी है। जल्द ही नियमावली को मुख्यमंत्री से मंजूरी दिलाकर लागू किया जाएगा।

पार्किंग स्थलों पर देनी होंगी ये सुविधाएं

  • सीसीटीवी, इनवर्टर, जनरेटर, शौचालय, पिंक शौचालय, सुरक्षा गार्ड और फायर फाइटिंग की व्यवस्था।
  • दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए तय शुल्क का घंटेवार सूचना का बोर्ड लगाना होगा।
  • संबंधित ठेकेदार के अलावा वहां कार्यरत कर्मियों के नाम व मोबाइल नंबर लिखा बोर्ड लगाना होगा।

नियमावली में ये प्रावधान भी…

  • पार्किंग स्थल पर काम करने वाले कर्मियों का पुलिस द्वारा सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
  • हर तीन महीने पर ठेके की शर्त की समीक्षा होगी। गड़बड़ी पर ठेका निरस्त किया जाएगा।
यह भी पढ़ें -  Bundelkhand Expressway Inauguration Live: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का आज लोकार्पण करेंगे पीएम मोदी, सात जिलों का हो जाएगा कायाकल्प

विस्तार

प्रदेश के बड़े शहरों में नगर निकाय अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी से चल रहे अवैध पार्किंग का खेल बंद किया जाएगा। नगर निगम वाले सभी 17 बड़े शहरों में पार्किंग को व्यवस्थित करने और एक समान शुल्क वसूली के लिए प्रस्तावित नियमावली लागू करने की तैयारी है। नगर विकास विभाग इस नियमावली का परीक्षण कर रहा है। इसके लागू होने से अवैध पार्किंग का धंधा बंद होगा और लोगों से अनाप-शनाप शुल्क की वसूली पर भी रोक लगेगी।

दरअसल सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध पार्किंग का खेल चलता है। जहां अक्सर जाम लगते हैं, वहां निकाय अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार अवैध पार्किंग बनाकर 10 से 30 रुपये तक की शुल्क की वसूली करते हैं। वहीं कई स्थानों पर नगर निकाय के संबंधित अधिकारी ही पार्किंग बनाकर वसूली शुरू कर देते हैं तो कई स्थानों पर दबंग अवैध पार्किंग बनाकर वाहनों को खड़ा कराने लगते हैं। इससे कई बार मारपीट जैसी स्थिति भी बन जाती है और बेतरतीब तरीके से वाहनों की पार्किंग कराने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

इन स्थितियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहरों की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही वाहनों की पार्किंग व्यवस्थित करने और एक समान शुल्क निर्धारित करने का निर्देश दे रखा है। इसी कड़ी में उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने सरकार को पार्किंग के लिए एक समान नियम व शुल्क तय करते हुए उप्र नगर निगम (पार्किंग स्थलों का निर्माण, संधारण एवं संचालन) नियमावली को लागू करने का सुझाव दिया है। पर, यह अब तक लागू नहीं हो सकी है। जल्द ही नियमावली को मुख्यमंत्री से मंजूरी दिलाकर लागू किया जाएगा।

पार्किंग स्थलों पर देनी होंगी ये सुविधाएं

  • सीसीटीवी, इनवर्टर, जनरेटर, शौचालय, पिंक शौचालय, सुरक्षा गार्ड और फायर फाइटिंग की व्यवस्था।
  • दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए तय शुल्क का घंटेवार सूचना का बोर्ड लगाना होगा।
  • संबंधित ठेकेदार के अलावा वहां कार्यरत कर्मियों के नाम व मोबाइल नंबर लिखा बोर्ड लगाना होगा।

नियमावली में ये प्रावधान भी…

  • पार्किंग स्थल पर काम करने वाले कर्मियों का पुलिस द्वारा सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
  • हर तीन महीने पर ठेके की शर्त की समीक्षा होगी। गड़बड़ी पर ठेका निरस्त किया जाएगा।

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