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तब 205.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। 2013 में 1.9 मिमी. बारिश हुई थी। इस बार धूल भरी आंधी तो कई बार आई लेकिन बादल नहीं बरसे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिवसीय जलवायु परिवर्तन सेमिनार के अवसर पर आए राष्ट्रीय स्तर के मौसम वैज्ञानिकों ने मौसम के बदलाव की इस स्थिति पर चिंता जाहिर की है। मौसम विभाग के पास 12 साल पहले का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
मौसम विभाग की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार पूर्व और उत्तर पूर्व भारत में कई स्थानों पर प्री मानसून सीजन के दौरान अच्छी प्री मानसूनी बारिश दर्ज की गई। रिपोर्ट में बिहार व झारखंड दोनों को सामान्य बारिश की श्रेणी रखा गया है।
बिहार में सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है और झारखंड में 5 प्रतिशत कम रही, जबकि कानपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 प्रतिशत की कमी के साथ इस पूरे क्षेत्र को कम बारिश की श्रेणी में रखा गया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सात प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
सीएसए मौसम विभाग के प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय ने कहा कि कानपुर व इसके आसपास बारिश नहीं होने की जो सबसे बड़ी वजह सामने आई है, उसमें हीट आईलैंड का लगातार बढ़ना, मेट्रो व तमाम दूसरे निर्माण होने से उठने वाली धूल, वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से उठने वाला धुआं शामिल है। इसकी वजह से शहर के ऊपर हानिकारक गैसों की एक परत सी जमा हो गई है, जिससे जमीन से ऊपर उठने वाली उष्मा (गर्मी) परत से ऊपर नहीं जा पा रही है। ऐसे में हवा में नमी की मात्रा बारिश के लायक नहीं बन पा रही है।
मार्च से मई तक हुई बारिश का वार्षिक आंकड़ा (मिलीमीटर में)
2011 – 27.2
2012 – 9.6
2013 – 1.9
2014 – 22
2015 – 205.5
2016 – 59.7
2017 – 22.6
2018 – 18.4
2019 – 10.8
2020 – 147.5
2021 – 43.2
2022 – 0.2
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