लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्मस्थल केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना और सांस्कृतिक चेतना के भी केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने भारत की आस्था, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को सम्मान देने का कार्य किया है। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर को सम्मान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ धाम में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित कराई गई, जबकि समाजवादी पार्टी उनके नाम पर जनता को गुमराह करती रही है।
विधान परिषद में सोमवार को मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस ने राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक आयोजनों का विरोध किया। सपा सरकार के दौरान कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा पर रोक लगाई गई। वहीं दीपोत्सव और रंगोत्सव जैसे आयोजनों को भी बाधित किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को मिथक बताया, जबकि सपा शासन में रामभक्तों पर गोलियां तक चलीं और मंदिर निर्माण के मार्ग में कानूनी अड़चनें खड़ी की गईं। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि भारत की आस्था को कैद करने का प्रयास अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
योगी ने कहा कि आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है और देश-प्रदेश से हर दिन लाखों श्रद्धालु वहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। डबल इंजन सरकार ने आस्था को सशक्त भारत की अटल आधारशिला मानते हुए प्रयागराज, अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली और नैमिषारण्य सहित बौद्ध, जैन और सिख तीर्थस्थलों का समग्र विकास किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की पहचान अब दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव जैसे आयोजनों से बन रही है। ये आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत के आध्यात्मिक गौरव को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का माध्यम हैं। आज हर भारतीय अयोध्या के दीपोत्सव, काशी की देव दीपावली और मथुरा-वृंदावन के रंगोत्सव से आत्मिक रूप से जुड़ाव महसूस करता है और यही नए उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश बीते साढ़े आठ–नौ वर्षों में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की यात्रा से गुजरा है। अब प्रदेश रेवेन्यू सरप्लस और उत्सव प्रदेश के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन की त्रिवेणी के रूप में देखा जा रहा है। यह केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली और विकास की दिशा का प्रतीक बन चुका है। प्रयागराज की पावन त्रिवेणी की तरह यह नई त्रिवेणी प्रदेश की प्रगति, पारदर्शिता और जनविश्वास की आधारशिला बनी है। बिना अतिरिक्त टैक्स लगाए टैक्स चोरी पर रोक लगाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया गया।








