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उन्नाव। 21 साल से लंबित शहर का मास्टर प्लान आखिरकार तैयार होकर शहरवासियों के सामने आ गया। मंगलवार को डीएम और सदर विधायक ने 2031 तक के लिए शहरी विकास की कार्ययोजना वाले उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण (यूएसडीए) के इस मास्टर प्लान के प्रदर्शन की शुरुआत की।
लोगों की आपत्तियां और सुझावों को शामिल करने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। डीएम अपूर्वा दुबे ने यूएसडीए उपाध्यक्ष का चार्ज लेने के पहले दिन ही सदर विधायक पंकज गुप्ता के साथ मास्टर प्लान का प्रारूप सौंपा है।
नए मास्टर प्लान के अनावरण के बाद से ही जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। 14 दिसंबर को आपत्तियां और सुझावों पर यूडीए की गठित समिति सुनवाई करेगी। इसके बाद शहर को फाइनल मास्टर प्लान सौंप दिया जाएगा। नए मास्टर प्लान से शहर के विकास को पंख लगने की उम्मीद की जा रही है।
इसमें 24 गांवों के विकास का खाका खींचा गया है। 14 पूर्ण रूप से विकसित हैं और 10 आंशिक रूप से। इस दौरान डीएम अपूर्वा दुबे ने लोगों को मास्टर प्लान के फाइनल होने से पहले ज्यादा से ज्यादा आपत्तियां या सुझाव देने पर जोर दिया है। कहा कि फाइनल होने से पहले सुझाव व आपत्तियां मिलने से बदलाव में सुविधा रहती है।
एक बार प्लान फाइनल हो गया तब आपत्तियों पर आसानी से फेरबदल नहीं किया जा सकता है। इस दौरान सदर विधायक ने नए मास्टर प्लान का स्वागत करते हुए प्राधिकरण के अधिकारियों से जनता को कम से कम दिक्कतों के साथ नए इसे लागू करने के निर्देश दिए। कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी कोशिश करें कि पुरानी व्यवस्थाओं को मिटाए बगैर नई व्यवस्थाएं बनाएं।
यह है नया मास्टर प्लान
नए मास्टर प्लान को मुख्यत: आवासीय, व्यावसायिक, पार्क/खुले स्थानों में बांटा गया है। आवासीय में ग्रामीण आबादी, निर्मित क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र हैं। वहीं व्यावसायिक प्लान में नगर केंद्र, जोनल व्यावसायिक, बाजार स्ट्रीट, थोक बाजार भंडार और मिनलर साइडिंग हैं। पार्क व खुले स्थान में हरित पट्टी, डिस्ट्रिक पार्क, जोनल पार्क और रिवर फ्रंट और विकास मुख्य है।
आखिरकार शहर का अपना मास्टर प्लान
1983 में जब प्राधिकरण की स्थापना हुई थी तो बिना शहर का सर्वे कराए लखनऊ का मास्टर प्लान ही शहर को दे दिया गया था। काफी सालों तक प्राधिकरण ने विकास की सुध तक नहीं ली थी। कुछ सालों से प्राधिकरण ने कार्रवाई करनी चालू की तो निर्माण करा चुके लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सर्वे के बाद जारी हुए मास्टर प्लान में व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र अलग होने से लोगों को दिक्कतों से निजात मिलने की उम्मीद की जा रही है।
एक महीने तक दे सकते हैं आपत्तियां और सुझाव
यूएसडीए के प्रभारी सचिव एपीएन सिंह ने बताया कि शहर के लोग एक महीने तक मास्टर प्लान को देखकर उसमें आपत्तियां और सुझाव दे सकते हैं। बताया कि लोगों की राय प्लान को बेहतर करने में मददगार साबित होगी। लोग आपत्ति और सुझाव एनआईसी की वेबसाइट या यूडीए कार्यालय में आकर दे सकते हैं। सुझाव और आपत्तियों की तीन कापियां होंगी। एक कापी सुझाव व आपत्ति देने वाले के पास, एक लखनऊ कार्यालय में और एक प्राधिकरण के कार्यालय में होगी।
उन्नाव। 21 साल से लंबित शहर का मास्टर प्लान आखिरकार तैयार होकर शहरवासियों के सामने आ गया। मंगलवार को डीएम और सदर विधायक ने 2031 तक के लिए शहरी विकास की कार्ययोजना वाले उन्नाव-शुक्लागंज विकास प्राधिकरण (यूएसडीए) के इस मास्टर प्लान के प्रदर्शन की शुरुआत की।
लोगों की आपत्तियां और सुझावों को शामिल करने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। डीएम अपूर्वा दुबे ने यूएसडीए उपाध्यक्ष का चार्ज लेने के पहले दिन ही सदर विधायक पंकज गुप्ता के साथ मास्टर प्लान का प्रारूप सौंपा है।
नए मास्टर प्लान के अनावरण के बाद से ही जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। 14 दिसंबर को आपत्तियां और सुझावों पर यूडीए की गठित समिति सुनवाई करेगी। इसके बाद शहर को फाइनल मास्टर प्लान सौंप दिया जाएगा। नए मास्टर प्लान से शहर के विकास को पंख लगने की उम्मीद की जा रही है।
इसमें 24 गांवों के विकास का खाका खींचा गया है। 14 पूर्ण रूप से विकसित हैं और 10 आंशिक रूप से। इस दौरान डीएम अपूर्वा दुबे ने लोगों को मास्टर प्लान के फाइनल होने से पहले ज्यादा से ज्यादा आपत्तियां या सुझाव देने पर जोर दिया है। कहा कि फाइनल होने से पहले सुझाव व आपत्तियां मिलने से बदलाव में सुविधा रहती है।
एक बार प्लान फाइनल हो गया तब आपत्तियों पर आसानी से फेरबदल नहीं किया जा सकता है। इस दौरान सदर विधायक ने नए मास्टर प्लान का स्वागत करते हुए प्राधिकरण के अधिकारियों से जनता को कम से कम दिक्कतों के साथ नए इसे लागू करने के निर्देश दिए। कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी कोशिश करें कि पुरानी व्यवस्थाओं को मिटाए बगैर नई व्यवस्थाएं बनाएं।
यह है नया मास्टर प्लान
नए मास्टर प्लान को मुख्यत: आवासीय, व्यावसायिक, पार्क/खुले स्थानों में बांटा गया है। आवासीय में ग्रामीण आबादी, निर्मित क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र हैं। वहीं व्यावसायिक प्लान में नगर केंद्र, जोनल व्यावसायिक, बाजार स्ट्रीट, थोक बाजार भंडार और मिनलर साइडिंग हैं। पार्क व खुले स्थान में हरित पट्टी, डिस्ट्रिक पार्क, जोनल पार्क और रिवर फ्रंट और विकास मुख्य है।
आखिरकार शहर का अपना मास्टर प्लान
1983 में जब प्राधिकरण की स्थापना हुई थी तो बिना शहर का सर्वे कराए लखनऊ का मास्टर प्लान ही शहर को दे दिया गया था। काफी सालों तक प्राधिकरण ने विकास की सुध तक नहीं ली थी। कुछ सालों से प्राधिकरण ने कार्रवाई करनी चालू की तो निर्माण करा चुके लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। सर्वे के बाद जारी हुए मास्टर प्लान में व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र अलग होने से लोगों को दिक्कतों से निजात मिलने की उम्मीद की जा रही है।
एक महीने तक दे सकते हैं आपत्तियां और सुझाव
यूएसडीए के प्रभारी सचिव एपीएन सिंह ने बताया कि शहर के लोग एक महीने तक मास्टर प्लान को देखकर उसमें आपत्तियां और सुझाव दे सकते हैं। बताया कि लोगों की राय प्लान को बेहतर करने में मददगार साबित होगी। लोग आपत्ति और सुझाव एनआईसी की वेबसाइट या यूडीए कार्यालय में आकर दे सकते हैं। सुझाव और आपत्तियों की तीन कापियां होंगी। एक कापी सुझाव व आपत्ति देने वाले के पास, एक लखनऊ कार्यालय में और एक प्राधिकरण के कार्यालय में होगी।
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