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इलाहाबाद हाईकोर्ट : दोबारा हाईस्कूूल पास कर सरकारी नौकरी पाने वाले कर्मचारी को राहत

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दोबारा हाईस्कूल परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी पाने के आरोप में बर्खास्त किए गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने याची चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बहाल करते हुए बर्खास्तगी अवधि का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनपद गाजीपुर के इंटर कॉलेज खालिसपुर के बर्खास्त कर्मचारी जितेंद्र यादव  की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची को वर्ष 2008 में नियुक्त किया गया था। तब याची ने 2002 में जारी हाईस्कूल मार्कशीट प्रस्तुत की थी जिसमें उसकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1986 दर्ज थी। किंतु 2009 में जितेंद्र बहादुर सिंह ने शिकायत की कि इससे पहले भी 1997 में जितेंद्र यादव हाईस्कूल पास कर चुका है। उन अभिलेखों के अनुसार जन्मतिथि 14 जनवरी 1981 है। इसके बाद मई 2009 में प्रधानाचार्य ने शिकायत के आधार पर जितेंद्र को बर्खास्त कर दिया था।

याची ने सेवासमाप्ति आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए डीआईओएस को गुणदोष के आधार पर निर्णय लेने का आदेश दिया। साथ ही याची को सात प्रतिशत ब्याज के साथ बर्खास्तगी अवधि के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि आठ सप्ताह में एरियर भुगतान न होने की दशा में याची 12 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान पाने का हकदार होगा।

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दोबारा हाईस्कूल परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी पाने के आरोप में बर्खास्त किए गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने याची चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बहाल करते हुए बर्खास्तगी अवधि का वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनपद गाजीपुर के इंटर कॉलेज खालिसपुर के बर्खास्त कर्मचारी जितेंद्र यादव  की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची को वर्ष 2008 में नियुक्त किया गया था। तब याची ने 2002 में जारी हाईस्कूल मार्कशीट प्रस्तुत की थी जिसमें उसकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1986 दर्ज थी। किंतु 2009 में जितेंद्र बहादुर सिंह ने शिकायत की कि इससे पहले भी 1997 में जितेंद्र यादव हाईस्कूल पास कर चुका है। उन अभिलेखों के अनुसार जन्मतिथि 14 जनवरी 1981 है। इसके बाद मई 2009 में प्रधानाचार्य ने शिकायत के आधार पर जितेंद्र को बर्खास्त कर दिया था।

याची ने सेवासमाप्ति आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए डीआईओएस को गुणदोष के आधार पर निर्णय लेने का आदेश दिया। साथ ही याची को सात प्रतिशत ब्याज के साथ बर्खास्तगी अवधि के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि आठ सप्ताह में एरियर भुगतान न होने की दशा में याची 12 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान पाने का हकदार होगा।

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