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समलैंगिक विवाह पर सिर्फ दो जज फैसला नहीं कर सकते: राज्यसभा में सुशील मोदी

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नई दिल्ली, 19 दिसंबर (आईएएनएस)| समलैंगिक विवाह पर आपत्ति जताते हुए राज्यसभा से भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने सोमवार को कहा कि यह समाज के नाजुक ताने-बाने को ‘चकनाचूर’ कर देगा।

ऐसे सामाजिक मामलों पर दो जज बैठकर फैसला नहीं कर सकते। संसद और समाज में बहस होनी चाहिए, उन्होंने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान जोर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उदारवादी पश्चिम का अंधानुकरण कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है और इस पर केंद्र से जवाब मांगा है।

शीर्ष अदालत ने बुधवार को समलैंगिक जोड़े द्वारा भारत में अपनी शादी को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया।

अधिवक्ता नूपुर कुमार के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, “वर्तमान याचिका यह प्रार्थना करते हुए दायर की गई है कि यह अदालत इस आशय की घोषणा जारी करने की कृपा कर सकती है कि LGBTQIA + समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को अपने विषमलैंगिक समकक्षों के समान विवाह का अधिकार है। और इसलिए एक इनकार भारत के संविधान के भाग III के अनुच्छेद 14, 19, और 21 के तहत गारंटीकृत अधिकारों का उल्लंघन है, और नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ..और NALSA v सहित सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में इसे बरकरार रखा गया है। भारतीय संघ।”

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(उपरोक्त लेख समाचार एजेंसी आईएएनएस से लिया गया है। Zeenews.com ने लेख में कोई संपादकीय परिवर्तन नहीं किया है। समाचार एजेंसी आईएएनएस लेख की सामग्री के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है)

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