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Unnao News: मासूम से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास

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संवाद न्यूज एजेंसी

उन्नाव। दो रुपये का लालच देकर मासूम से दुष्कर्म करने वाले युवक को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी युवक पर न्यायालय ने एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दी जाएगी।

औरास थानाक्षेत्र के गांव निवासी बच्ची से लखनऊ के मलिहाबाद के बाकीनगर का रहने वाले मतीन ने 26 फरवरी 2018 को दुष्कर्म किया था। पीड़ित किशोरी की मां ने उसी दिन तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपी मतीन ने दो रुपये का लालच देकर उसकी बेटी अपनी बक्से की दुकान में बुलाया और दुष्कर्म किया।

आरोपी के चंगुल से छूटने के बाद जब बच्ची घर पहुंची तो उसने आपबीती बताई थी। मां की तहरीर पर पुलिस ने मासूम से दुष्कर्म व एससी/एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। औरास पुलिस ने आरोपी मतीन के खिलाफ 30 जून 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।

गुरुवार को न्यायालय विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो डॉ. राजीव अवस्थी की दलील व साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने मतीन को दोषी पाते हुए मतीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

झोपड़ी में आग लगाने में सात साल की कैद

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उन्नाव। आपसी विवाद में झोपड़ी में आग लगाने वाले युवक को न्यायालय ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के पटपरगंज निवासी खुमानी की पत्नी रामरती ने विनोद के खिलाफ 17 जनवरी 2020 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि विनोद ने उसकी झोपड़ी में आग लगा दी थी। जिससे पूरी गृहस्थी जल गई थी। पुलिस ने आरोपी विनोद के खिलाफ 26 मार्च 2022 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। गुरुवार को जिला जज की कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। अभियोजक अनिल त्रिपाठी की दलीलों को सुन जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव ने आरोपी विनोद को सात साल कैद और पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।

पॉक्सो एक्ट के रिक्त न्यायालय भरने की मांग

उन्नाव। जनपद में पाक्सो एक्ट की तीन कोर्ट में दो रिक्त चल रही हैं। बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद बाजपेयी ने मुख्य न्यायाधीश प्रयागराज को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट पर न्यायपालिका व कार्यपालिका का विशेष ध्यान है। समय सीमा में वाद का निस्तारण करने का प्रावधान है। ऐसे में रिक्त न्यायालयों को भरा जाना आवश्यक है। (संवाद)

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