Home उत्तर प्रदेश बारिश और ओलावृष्टि ने बढ़ाई यूपी के कई जिलों में ठिठुरन

बारिश और ओलावृष्टि ने बढ़ाई यूपी के कई जिलों में ठिठुरन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में छिटपुट वर्षा और ओलावृष्टि ने ठंड में इजाफा किया है जबकि बेमौसम वर्षा से सरसों और आलू किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहने और बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। किसानों ने आशंका जताई है कि यदि असमय बारिश का सिलसिला जारी रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है तथा लागत निकालना कठिन हो जाएगा। वहीं कृषि विभाग ने किसी बड़े नुकसान की संभावना से इनकार किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, संभल जिले में सर्वाधिक 32.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। राजधानी लखनऊ में इस दौरान 6.9 मिमी बारिश हुई। अधिकतम तापमान गिरकर 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक-दो स्थानों पर ओलावृष्टि की भी सूचना है, जिनमें बरेली शामिल है। दोनों मौसमीय उपखंडों में तेज़ हवायें चलीं। आगरा में अधिकतम 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में घना कोहरा भी देखा गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, लखनऊ में सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा छाया रह सकता है, जबकि दिन में आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 23 और 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है, हालांकि कुछ स्थानों पर घना कोहरा पड़ने की प्रबल संभावना है।

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प्रदेश में हरदोई का दिन सबसे गर्म रहा, जहाँ अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि प्रयागराज में रात का तापमान सबसे अधिक 15.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इधर, असमय हुई बारिश से प्रदेश के कई जिलों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरसों, आलू और मटर की फसलों को नुकसान पहुँचा है।

रिपोर्टों के अनुसार, मंगलवार रात से रुक-रुक कर हुई बारिश ने फूल अवस्था में खड़ी सरसों की फसल को प्रभावित किया है, जिससे दानों के सही विकास पर असर पड़ने और उत्पादन घटने की आशंका है। अधिक नमी के कारण आलू और मटर की फसल भी प्रभावित हुई है। गेहूं की फसल के लिए यह बारिश लाभकारी साबित हुई है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय मिली नमी से गेहूं की बढ़वार और उत्पादकता में सुधार होगा। कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि प्रारंभिक आकलन में फसलों को किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा, “ये बारिश व्यापक जरूर रही, लेकिन इतनी तेज नहीं थी कि फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचा सके। बल्कि यह गेहूं की फसल के लिए अमृत समान है, जिसे इस समय नमी की आवश्यकता होती है।”

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