Home उत्तर प्रदेश नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से फिर बिगड़ेगा मौसम, पहाड़ों पर बर्फ़बारी

नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से फिर बिगड़ेगा मौसम, पहाड़ों पर बर्फ़बारी

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दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कई जगहों पर घना कोहरा छाए रहने से बड़े स्तर पर यातायात प्रभावित हुआ और ट्रेनों एवं उड़ानों में देरी हुई। दिल्ली हवाई अड्डे ने यात्रियों को उड़ान के समय और जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइंस से संपर्क करने की सलाह दी। हवाई अड्डे ने बताया कि कोहरे की स्थिति के कारण सीएटी-3 स्थितियों में बदलाव के कारण देरी हो सकती है।

खास बात यह है कि सीएटी-3 प्रणाली बहुत कम या लगभग शून्य दृश्यता में भी विमानों को उतरने की अनुमति देता है। गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और बहादुरगढ़ जैसे एनसीआर शहरों की बात करें तो कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से सुबह के समय काम पर जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। इस बीच, मंगलवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो मौसम के औसत से थोड़ा ज़्यादा था।

शांत हवाओं के बावजूद लोगों को ठंड महसूस कर रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान के अनुसार, कम तापमान और मौसम की स्थितियों के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक थोड़ा बढ़ सकता है, हालांकि यह अभी खराब श्रेणी में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक सुबह 10 बजे 260 के सूचकांक के साथ खराब श्रेणी में बना रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, रात में धुंध और हल्का कोहरा छाया रह सकता है, जबकि दिन के दौरान अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए भी इसी तरह के मौसम की स्थिति का पूर्वानुमान जताया है। इस बीच आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर हल्का कोहरा रहेगा, जबकि शहर में सुबह के समय कुछ जगहों पर घना कोहरा भी छाने के आसार हैं।

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मंगलवार तड़के कानपुर, औरैया, जालौन समेत करीब 10 जिलों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई। उन्नाव, चित्रकूट और इटावा में करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई, जिससे सड़कों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। बेमौसम बारिश और ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलें गिर गईं और किसानों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

मौसम विभाग के अनुसार बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर और आसपास के इलाकों में बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। अचानक बदले मौसम के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोग घरों में दुबके रहे, जबकि जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को छाता और रेनकोट का सहारा लेना पड़ा।

वहीं, लखनऊ, अलीगढ़, मैनपुरी, बुलंदशहर समेत लगभग 20 जिलों में घना कोहरा छाया रहा। बर्फीली हवाओं के कारण ठंड एक बार फिर बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक न्यूनतम तापमान गिरकर 6.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब दर्ज की गई, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ।

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इस बीच मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि प्रदेश के 26 जिलों में बारिश और 29 जिलों में भीषण घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। ऐसे में रात और सुबह की ठंड अभी और परेशान करेगी।

हिमस्खलन की गंभीर चेतावनी के बाद राज्य के उच्च ऊंचाई वाले जिलों, विशेष रूप से किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा में हाई अलर्ट जारी किया गया है। यह चेतावनी सोमवार दोपहर रिब्बा गांव के पास हुए हिमस्खलन के बाद जारी की गई है, जिससे स्थानीय समुदाय में दहशत फैल गई है और क्षेत्र के बीहड़ हिमालयी इलाकों में इससे उत्पन्न होने वाले खतरों को लेकर चिंता जताई गई है।

लाहौल और स्पीति के जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने हिमस्खलन संबंधी चेतावनी (खतरे का स्तर 3, ऑरेंज) जारी की है, जो आज शाम 5:30 बजे तक वैध है। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पुनर्वास एवं रोजगार महानिदेशालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर जारी की गई चेतावनी पर कहा गया है कि 3,000 मीटर से अधिक की अत्यधिक ढलानों पर हिमस्खलन होने का अनुमान जताया गया है।

अधिकारियों ने जनता से केवल सुरक्षित मार्गों पर ही आवागमन सीमित करने का आग्रह किया है। कल दोपहर के आसपास, पवित्र किन्नौर कैलाश पर्वत के नीचे स्थित रिब्बा गांव के पास हिमस्खलन होने के बाद यह चेतावनी तुरंत प्रासंगिक हो गई। हालांकि हिमस्खलन का मलबा एक गहरी खाई में गिर गया, जिससे कोई हताहत या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ लेकिन इस अचानक हुई घटना ने आसपास के क्षेत्रों में दहशत फैला दी और संभावित खतरे को उजागर कर दिया।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने के आसार
राजस्थान के भरतपुर संभाग में पश्चिमी विक्षोभ के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने के आसार से किसानों में चिंता व्याप्त हो गयी है। कोहरा और ओस को गेहूं सहित बाकी फसलों के लिए लाभदायक बताया जा रहा है, लेकिन पिछले दिनों हुई मावठ से सरसों की फसल में तना गलन की समस्या सामने आ रही है, जिससे किसानों को नुकसान होने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। पिछले कई दिनों से बार-बार छा रहे घने कोहरे से दृश्यता 40 मीटर से भी कम हो रही है। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य मार्गों पर भारी वाहनों का यातायात बाधित हो रहा है। ठंडी हवाओं के चलने के कारण सर्दी भी बढ़ गयी है। ठंड और नमी के कारण बुजुर्गों एवं बच्चों में मौसमी बीमारियों की आशंका बढ़ गयी है।

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