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UP में खत्म होगी जाम की समस्या, प्रदेश के 172 प्रमुख मार्गों पर C-RTC योजना लागू

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने कहा है कि प्रदेश में तेजी से बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए यातायात निदेशालय द्वारा सी-आरटीसी (सिटी रेड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन) योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के 20 जिलों के 172 प्रमुख मार्गों को चिन्हित कर उन्हें जाम मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

पुलिस राज्य मुख्यालय के सिग्नेचर बिल्डिंग में मंगलवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डीजीपी कृष्णा ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए योजना के तहत प्रदेश में उन मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां पीक आवर्स में सबसे अधिक जाम लगता है।

चिन्हित मार्गों में आगरा, अयोध्या, बरेली, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, प्रयागराज सहित 20 जिले शामिल हैं। इन मार्गों पर यातायात को सुचारू बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि योजना की सबसे अहम कड़ी “रूट मार्शल” प्रणाली है। “एक रूट, एक रूट मार्शल” के सिद्धांत पर प्रत्येक मार्ग के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो उस मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होगा।

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आवश्यकता अनुसार एक अधिकारी को एक से अधिक मार्गों की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। डीजीपी राजीव कृष्णा ने कहा कि इस योजना में एआई आधारित आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे चिन्हित मार्गों पर न्यूनतम, अधिकतम और औसत ट्रैवल टाइम का विश्लेषण किया जाएगा। यह प्रणाली रियल टाइम में जाम की स्थिति को मैप पर प्रदर्शित करेगी, जिससे नोडल अधिकारी अपने स्मार्टफोन के माध्यम से किसी भी समय ट्रैफिक की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे।

इसके साथ ही पिछले दो माह तक का डेटा भी उपलब्ध रहेगा, जिससे बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए “5ई मॉडल” एजुकेशन (जागरूकता), इंफोर्समेंट (प्रवर्तन), इंजीनियरिंग (तकनीकी हस्तक्षेप), इंक्रोचमेंट रिमूवल (अतिक्रमण हटाना) और ई-रिक्शा संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पहले चरण में पीक आवर्स के दौरान अधिकतम ट्रैवल टाइम में 20 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया है। यातायात निदेशालय द्वारा चिन्हित मार्गों की नियमित निगरानी और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। एक माह के बाद योजना की समीक्षा कर इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा।

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