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पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी, चुनाव कार्यक्रम की तैयारियां तेज

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने बुधवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। जिला स्तर पर सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। इस बार पंचायत चुनाव के मतदाताओं को नौ अंकों का विशिष्ट स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) भी आवंटित किया गया है। इससे मतदाताओं की पहचान और चुनावी प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

आयोग ने दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया है। इसके साथ ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना और चुनाव कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर को अनंतिम मतदाता सूची जारी की थी, जिसमें 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। पुनरीक्षण अभियान के दौरान लगभग 1.41 करोड़ नाम सूची से हटाए गए, जबकि 40.19 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया। संशोधन और सत्यापन की लंबी प्रक्रिया के बाद अब अंतिम सूची जारी कर दी गई है।

मतदाता सूची का प्रकाशन जिलाधिकारियों के माध्यम से कराया गया है। आयोग अब सभी जिलों से प्राप्त आंकड़ों का संकलन कर अंतिम आंकड़े सार्वजनिक करेगा। सूत्रों के अनुसार अंतिम मतदाता संख्या में आंशिक बदलाव संभव है। पंचायत चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ चुकी है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव की संभावित समय-सीमा के बारे में जानकारी मांगी थी। ऐसे में अंतिम मतदाता सूची जारी होने को चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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सूत्रों के अनुसार आयोग को अंतिम मतदाता सूची तैयार करने में करीब 169 दिन का समय लगा। हालांकि सूची जारी होने के बाद कुछ जिलों में तकनीकी कारणों से इसे डाउनलोड करने में दिक्कतें सामने आई हैं। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए हैं।

पंचायत चुनाव में पहली बार प्रत्येक मतदाता को नौ अंकों का विशिष्ट स्टेट वोटर नंबर दिया गया है। इससे मतदाता की पहचान, रिकॉर्ड प्रबंधन और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने की दिशा में आयोग की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की नजर अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी है।

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