उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसे शातिर शख्स को गिरफ्तार किया है जो साधु-संत का चोला ओढ़कर लंबे समय से छिपकर रह रहा था। खास बात यह है कि यह तथाकथित बाबा सोशल मीडिया पर काफी मशहूर था और अपनी हरकतों से लोगों को बेवकूफ बना रहा था। आरोपी की पहचान प्रदीप शुक्ला उर्फ काली सरकार के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह मऊरानीपुर के कुरैंचा गांव स्थित काली माता मंदिर में अपनी पहचान बदलकर संत के रूप में रह रहा था।
झांसी के मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के कुरैंचा गांव में एक काली माता का मंदिर है। इसी मंदिर में एक शख्स पिछले कुछ सालों से अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। लोग उसे सत्यानंद शुक्ला या काली सरकार के नाम से जानते थे। बाबा जी ने मंदिर को अपना ठिकाना बनाया हुआ था और वहां बकायदा ‘दिव्य दरबार’ सजाते थे।
यह फर्जी बाबा अपने दरबार में आने वाले लोगों से बड़े-बड़े दावे करता था। वह लोगों की बीमारियां ठीक करने और उनकी हर तरह की समस्याओं का चुटकियों में समाधान करने का ढोंग रचता था। भोले-भाले लोग उसकी बातों में आ जाते थे। इतना ही नहीं, यह बाबा सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव था। इंस्टाग्राम पर इसके एक लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, जो इसके वीडियो और रील्स देखकर इसके झांसे में फंसते चले जा रहे थे।
असल में, यह चमक-धमक और भक्ति का दिखावा सिर्फ पुलिस की नजरों से बचने का एक नाटक था। इस तथाकथित काली सरकार का असली नाम प्रदीप शुक्ला है और यह हरदोई जिले का रहने वाला है। हरदोई पुलिस को इस शख्स की तलाश कई सालों से थी। इसके खिलाफ साल 2014 में लूट का और 2018 में मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। कोर्ट में बार-बार पेश न होने की वजह से अदालत ने इसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर रखा था। पुलिस इसकी तलाश में जुटी हुई थी कि तभी इसके झांसी में छिपे होने की पक्की खबर मिल गई।
जब हरदोई पुलिस को यह सुराग मिला कि उनका वांटेड आरोपी झांसी के एक मंदिर में काली सरकार बनकर मजे से रह रहा है, तो हरदोई और मऊरानीपुर की पुलिस ने मिलकर एक साझा ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने मंदिर पर दबिश दी और इस फर्जी संत को धर दबोचा। मऊरानीपुर के सीओ रत्नेश्वर सिंह ने पुष्टि की है कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे कुछ लोग धर्म और आस्था की आड़ में कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करते हैं, लेकिन आखिरकार कानून के हाथ लंबे ही होते हैं।







