लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। गड़वार थाना क्षेत्र के कनैला स्थित नवीन पोखरा प्राथमिक विद्यालय में सोमवार, 2 नवंबर की सुबह कक्षा चार के 11 वर्षीय छात्र अरशद अहमद की हाईटेंशन बिजली के तार की चपेट में आने से झुलसकर मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि स्कूल स्टाफ ने मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की सब्जी के लिए लौकी तोड़ने के वास्ते उसे जानबूझकर विद्यालय की छत पर चढ़ाया था।
विशुकिया गांव निवासी इजहार अहमद का 11 वर्षीय बेटा अरशद अपने माता-पिता की छह संतानों में सबसे छोटा था। वह रोज की तरह सोमवार को भी हंसते-खेलते पढ़ाई करने स्कूल गया था। परिजनों के अनुसार, शिक्षकों के कहने पर जब वह विद्यालय की छत पर चढ़कर लौकी तोड़ रहा था, तभी छत के एकदम करीब से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार से उसका स्पर्श हो गया। करेंट इतना भीषण था कि झुलसने से मासूम की मौके पर ही जान चली गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया।
मासूम की मौत की खबर फैलते ही उग्र ग्रामीणों और परिजनों ने विद्यालय परिसर का घेराव कर जोरदार हंगामा किया। स्थिति तनावपूर्ण होती देख कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने दोषियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की पुरजोर मांग उठाई। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और बेसिक शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने उचित कानूनी कार्रवाई व सहायता का आश्वासन देकर स्थिति को संभाला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष कुमार सिंह ने प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय शंकर और सहायक अध्यापक अनिल कुमार को गंभीर लापरवाही व दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही शिक्षामित्र दीपचंद राम की सेवा समाप्त करने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उधर, मृतक छात्र के बड़े भाई सलमान की तहरीर पर पुलिस ने प्रभारी प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक, शिक्षामित्र और बिजली विभाग के अवर अभियंता (JE) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक (SP) इराज राजा के अनुसार, त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रभारी प्रधानाध्यापक विजय शंकर, सहायक अध्यापक अनिल कुमार और शिक्षामित्र दीपचंद राम को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विद्यालय का रसोईघर मुख्य भवन से महज छह फीट की दूरी पर है और उसके ठीक ऊपर से मौत बनकर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। इस वीभत्स हादसे ने बेसिक शिक्षा विभाग और बिजली विभाग की घोर अनदेखी को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस कार्य के लिए वयस्क या रसोइया जिम्मेदार थे, उसके लिए एक छोटे और अबोध बच्चे को इतनी खतरनाक जगह पर क्यों भेजा गया? फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत कानूनी जांच में जुटी हुई है।








