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Allahabad High Court : वक्फ अधिकरण को हिंदू-मुस्लिम के बीच विवाद सुनवाई का अधिकार नहीं

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हाईकोर्ट।

हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला

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वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी में पूजा की अनुमति के खिलाफ  याचिका की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, बृहस्पतिवार को भी होगी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेजे मुनीर कर रहे हैं। बुधवार को लगभग 45मिनट चली सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन तथा विष्णु जैन ने बहस की। 

उनका कहना था कि वक्फ  एक्ट के तहत विवाद होने पर सिविल कोर्ट को वाद सुनवाई का अधिकार नहीं है। वक्फ  अधिकरण में ही केस की सुनवाई की जा सकती है। किंतु वक्फ  एक्ट में मुस्लिमों के बीच विवाद की सुनवाई हो सकती है। लेकिन, वक्फ  अधिकरण को हिंदू मुस्लिम के बीच विवाद की सुनवाई का अधिकार नहीं है।

उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर कानून के हवाले से कहा, पूरा ज्ञानवापी परिसर विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र है। दीन मोहम्मद केस में केवल गुंबदों के नीचे नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई है। मालिकाना हक नहीं दिया गया है। शृंगार गौरी की आजादी से पहले से पूजा होती आ रही है। इसलिए पूजा नहीं रोकी जा सकती।

जिलाधिकारी वाराणसी की ओर से रामजन्म भूमि विवाद के दौरान पूजा रोकना  सांविधानिक अधिकारों का उल्लघंन है। अधीनस्थ अदालत ने विपक्षी वादियों के पूजा के अधिकार के मुकद्दमे की पोषणीयता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त कर सही किया है। याचिका खारिज होने योग्य है। सुनवाई जारी है।

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वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी में पूजा की अनुमति के खिलाफ  याचिका की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, बृहस्पतिवार को भी होगी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेजे मुनीर कर रहे हैं। बुधवार को लगभग 45मिनट चली सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन तथा विष्णु जैन ने बहस की। 

उनका कहना था कि वक्फ  एक्ट के तहत विवाद होने पर सिविल कोर्ट को वाद सुनवाई का अधिकार नहीं है। वक्फ  अधिकरण में ही केस की सुनवाई की जा सकती है। किंतु वक्फ  एक्ट में मुस्लिमों के बीच विवाद की सुनवाई हो सकती है। लेकिन, वक्फ  अधिकरण को हिंदू मुस्लिम के बीच विवाद की सुनवाई का अधिकार नहीं है।

उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर कानून के हवाले से कहा, पूरा ज्ञानवापी परिसर विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र है। दीन मोहम्मद केस में केवल गुंबदों के नीचे नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई है। मालिकाना हक नहीं दिया गया है। शृंगार गौरी की आजादी से पहले से पूजा होती आ रही है। इसलिए पूजा नहीं रोकी जा सकती।

जिलाधिकारी वाराणसी की ओर से रामजन्म भूमि विवाद के दौरान पूजा रोकना  सांविधानिक अधिकारों का उल्लघंन है। अधीनस्थ अदालत ने विपक्षी वादियों के पूजा के अधिकार के मुकद्दमे की पोषणीयता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त कर सही किया है। याचिका खारिज होने योग्य है। सुनवाई जारी है।



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