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छाती में पहुंच गए थे पेट के अंग, जटिल ऑपरेशन से छह माह की बच्ची को मिला नया जीवन

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लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी कर छह माह की बच्ची को नया जीवन देने में सफलता हासिल की है। जन्मजात बीमारी के कारण बच्ची के पेट के अंग छाती की गुहा में पहुंच गए थे, जिससे उसे सांस लेने समेत कई गंभीर समस्याएं हो रही थीं। सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और शनिवार सुबह उसे वेंटिलेटर से भी हटा दिया गया।

सुल्तानपुर जिले के रामपुर गांव निवासी दंपति की बेटी जन्म से सांस संबंधी गंभीर परेशानी से पीड़ित थी। छह माह की आयु तक बार-बार उल्टी होने के साथ वह बेहोश होने लगी। 31 जनवरी को गंभीर अवस्था में परिजन बच्ची को बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को पीडियाट्रिक वार्ड-3 में शिफ्ट किया गया।

पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने खून की जांच के साथ एक्स-रे, ईकोकार्डियोग्राफी, कॉन्ट्रास्ट स्टडी और सीटी स्कैन कराया। सीटी स्कैन में पता चला कि बच्ची के दाईं तरफ के डायफ्राम में जन्मजात सुराख है। इस बीमारी को चिकित्सा विज्ञान में कन्जनाइटल डायफ्रामेटिक हर्निया कहा जाता है।

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डॉ. अखिलेश ने बताया कि छोटी और बड़ी आंत सहित पेट के अन्य अंग छाती की गुहा में चले गए थे। जिससे बाएं फेफड़े का विकास नहीं हो पाया था। दायां फेफड़ा और दिल दबाव में आ गए थे। बच्ची की जान बचाने के लिए छह फरवरी को जटिल ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान डायफ्राम की मरम्मत कर पेट के सभी अंगों को पुनः पेट की गुहा में स्थापित किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्ची को पीआईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। 24 घंटे बाद वेंटिलेटर हटा दिया गया और अब बच्ची की हालत स्थिर और बेहतर है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्ची की निगरानी कर रही है।

एनेस्थीसिया टीम में डॉ. एमपी सिंह, डॉ. वैभव पांडेय, पीआईसीयू प्रभारी डॉ. अनिमेष कुमार, नर्सिंग स्टाफ सीमा शुक्ला, अंजना सिंह, सिस्टर इंचार्ज उर्मिला सिंह तथा सहायक स्टाफ राजू, गिरिश और सुनील का योगदान सराहनीय रहा।

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