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Unnao News: मृत घोषित महिला को जीवित खोजने में इंस्पेक्टर सम्मानित

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हसनगंज (उन्नाव)। मृत घोषित महिला को महाराष्ट्र से जीवित खोजने और उसकी हत्या में जेल में बंद दिव्यांग को वर्ष अक्तूबर 2020 में निर्दोष साबित कर रिहा कराने वाले इंस्पेक्टर राजेश सिंह को एडीजी लखनऊ जोन पीयूष मोर्डिया ने प्रशस्तिपत्र दिया है। उन्होंने गहन विवेचना और सच्चाई सामने लाने पर उनकी तारीफ भी की है।

मालूम हो कि 21 मार्च 2018 को उन्नाव शहर के मोहल्ला जुराखनखेड़ा निवासी योगेंद्र कुमार अवस्थी की 18 वर्षीय पत्नी श्रद्धा गुप्ता रहस्यमय हालात में घर से लापता हो गई थी। इसके बाद दो अप्रैल 2018 को आसीवन थाना क्षेत्र के शेरपुरकला गांव में नहर के पास करीब 18 वर्षीय युवती का जला शव मिला था। तत्कालीन ग्राम प्रधान किशनपाल यादव ने अज्ञात के खिलाफ युवती की हत्या और शव जलाने की रिपोर्ट आसीवन थाने में दर्ज कराई थी। शव बुरी तरह जला होने से पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर डॉक्टरों ने डीएनए सैंपल सुरक्षित किया था। 27 मई 2018 को चूड़ी, कपड़े और शव के फोटो देखकर जुराखन खेड़ा मोहल्ला निवासी योगेंद्र ने शव को अपनी पत्नी श्रद्धा उर्फ माही का बताया। उसने पड़ोस में रहने वाले दिव्यांग प्रमोद कुमार लोधी पर हत्या करने और शव छिपाने का आरोप लगा रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

आसीवन थाना के तत्कालीन विवेचक प्रमोद वर्मा ने नौ जून 2018 को हत्यारोपी प्रमोद कुमार लोधी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसी दौरान विवेचक प्रमोद वर्मा का तबादला होने पर विवेचना दरोगा जयशंकर सिंह को मिली तो उन्होंने तीन सितंबर 2018 को प्रमोद लोधी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके बाद 2020 में औरास थाने की कमान संभालने वाले एसओ राजेश सिंह मुकदमे की फाइल का गहना से अध्यन किया और तथाकथित मृतका श्रद्धा उर्फ माही के डीएनए सैपल का उसकी तीन साल की बेटी गौरी के सैंपल की जांच कराई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला से आई डीएनए रिपोर्ट मैच न करने पर पुलिस चौक गई।

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स्पष्ट हो गया कि जिस युवती का जला शव मिला व श्रद्धा उर्फ माही का नहीं है। औरास के तत्कालीन एसो (वर्तमान में हसनगंज कोतवाली प्रभारी) राजेश सिंह ने नए सिरे से जांच शुरू की। जांच के दौरान उन्होंने सर्विलांस व माध्यमों से की गई जांच से 14 अक्तूबर 2020 को श्रद्धा उर्फ माही को को महाराष्ट्र के अहमदनगर से खोज निकाला था। वह वहां एक अस्पताल में काम कर रही थी। इसी आधार पर इंस्पेक्टर राजेश सिंह ने हत्यारोपी दिव्यांग प्रमोद कुमार लोधी को न्यायालय के माध्यम से हत्या के मुकदमे से बरी कराया था। इस मुकदमे की विवेचना में किए गए अतिरिक्त प्रयास और सूझबूझ को देखते हुए एडीजी (अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन) पीयूष मोर्डिया ने प्रशस्ति पत्र दिया है।

ऐसे पकड़ में आया था मामला

महाराष्ट्र के एक नर्सिंगहोम में नौकरी कर रही श्रद्धा ने एक्सिस बैंक के खाते पर एटीएम कार्ड के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उसने उन्नाव के पते से बना आधार कार्ड लगाया था। बैंक से डाक के जरिए डेबिट कार्ड उसके उन्नाव के पते पर पहुंचा तो परिजनों में सुगबुगाहट शुरू हो गई। जानकारी होने पर हत्यारोपी के परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने बैंक से संपर्क किया और श्रद्धा के मोबाइल नंबर की जानकारी ली। इसके बाद सर्विलांस की मदद से उसकी लोकेशन निकाली और उस तक पहुंच गई।

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