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पुलिस भर्ती 2021 : एससी कोटे की सीट पर भर्ती में सामान्य, ओबीसी अभ्यर्थियों के चयन को हाईकोर्ट में चुनौती

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक सिपाही भर्ती-2021 में एससी कोटे की सीट पर सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थियों के चयन के मामले में यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। पवन कुमार भारती तथा अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की पीठ सुनवाई कर रही थी।

याची की ओर से कहा गया कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने फरवरी-2021 में उपनिरीक्षक नागरिक, पुलिस प्लॉटून कमांडर पीएसी और अग्निशमन अधिकारी के 9534 पद विज्ञापित किए गए थे। इसकी परिणाम तथा चयन सूची भर्ती बोर्ड ने 12 जून 2022 को जारी करते हुए अनुसूचित जाति की श्रेणी में दो हजार उम्मीदवारों को चयनित घोषित किया। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को भी चयनित कर दिया गया है। यह आरक्षण नीति के खिलाफ है।

इसके अतिरिक्त याची के अधिवक्ता की ओर से भर्ती बोर्ड  से चयनित उम्मीदवारों की याचिका में प्राप्ताकों को भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। कोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई केलिए 31 अक्तूबर की तिथि तय की है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक सिपाही भर्ती-2021 में एससी कोटे की सीट पर सामान्य और ओबीसी अभ्यर्थियों के चयन के मामले में यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। पवन कुमार भारती तथा अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की पीठ सुनवाई कर रही थी।

याची की ओर से कहा गया कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने फरवरी-2021 में उपनिरीक्षक नागरिक, पुलिस प्लॉटून कमांडर पीएसी और अग्निशमन अधिकारी के 9534 पद विज्ञापित किए गए थे। इसकी परिणाम तथा चयन सूची भर्ती बोर्ड ने 12 जून 2022 को जारी करते हुए अनुसूचित जाति की श्रेणी में दो हजार उम्मीदवारों को चयनित घोषित किया। इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को भी चयनित कर दिया गया है। यह आरक्षण नीति के खिलाफ है।

इसके अतिरिक्त याची के अधिवक्ता की ओर से भर्ती बोर्ड  से चयनित उम्मीदवारों की याचिका में प्राप्ताकों को भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। कोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद यूपी सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई केलिए 31 अक्तूबर की तिथि तय की है।

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