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शोध : जोंकें अब चूसेंगी कई खतरनाक बीमारियां

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जोंक से ऐसे होता है उपचार

जोंक से ऐसे होता है उपचार
– फोटो : साेशल मीडिया

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में जोंक थेरेपी से इलाज के साथ जोंक की पैदावार भी होगी। अधिक पैदावार होने पर उसे जोंक थेरेपी करने वाले अन्य चिकित्सकों को बेचा जाएगा। तिब्बिया कॉलेज इस पुरातन उपचार के तरीके को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए तिब्बिया कॉलेज में 15 गुणा 15 फुट के आकार का तालाब बनाया गया है, जिसमेें 150 जोंकें डाली गई हैं।

जोंक थेरेपी से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस थेरेपी को 30-40 मिनट तक लिया जाता है। जोंक की लार गैंगरीन सहित अन्य बीमारियों के लिए फायदेमंद है। इसकी लार में एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में मददगार होता है। इसके अलावा जोंक शरीर के हानिकारक कीटाणुओं को चूसकर खत्म कर देती है। एक जोंक की औसत उम्र 4 से 5 साल होती है। एक जोंक 40-50 अंडे देती है। इनके प्रजनन का मुफीद समय मार्च और मई होता है।

जोंक थेरेपी के फायदे

  • जोंक थेरेपी से गंजेपन की परेशानी दूर की जा सकती है। इससे सिर का रक्तसंचार बेहतर होता है।
  • जोंक थेरेपी से रक्त संचार बेहतर होने से बाल झड़ने की समस्या से राहत पाई जा सकती है।
  • नसों में जमे खून के थक्के को खत्म कर सकते हैं।
  • जोंक थेरेपी से दाद और एग्जिमा जैसे त्वचा रोग में सहायक होते है।

जोंक थेरेपी से नुकसान

  • जोंक थेरेपी लेने से रक्तस्राव की संभावना
  • शरीर में खून की कमी हो सकती है
  • एलर्जिक होने की संभावना
  • अधिक दर्द हो सकता है
  • खुलजी शुरू हो सकती है
  • बैक्टीरियल संक्रमण होना
  • फफोले जैसा महसूस होना

जोंक की पैदावार के लिए तालाब बनाया गया है। ज्यादा पैदावार होने पर जोंक को बेचा जाएगा। एक और तालाब बनाया जाएगा। जोंक थेरेपी से इलाज शुरू हो चुका है। इसके नतीजे सुखद आ रहे हैं।
-डॉ. मोहम्मद शोएब, जोंक बैंक इंचार्ज, तिब्बिया कॉलेज, एएमयू

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विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में जोंक थेरेपी से इलाज के साथ जोंक की पैदावार भी होगी। अधिक पैदावार होने पर उसे जोंक थेरेपी करने वाले अन्य चिकित्सकों को बेचा जाएगा। तिब्बिया कॉलेज इस पुरातन उपचार के तरीके को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए तिब्बिया कॉलेज में 15 गुणा 15 फुट के आकार का तालाब बनाया गया है, जिसमेें 150 जोंकें डाली गई हैं।

जोंक थेरेपी से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस थेरेपी को 30-40 मिनट तक लिया जाता है। जोंक की लार गैंगरीन सहित अन्य बीमारियों के लिए फायदेमंद है। इसकी लार में एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में मददगार होता है। इसके अलावा जोंक शरीर के हानिकारक कीटाणुओं को चूसकर खत्म कर देती है। एक जोंक की औसत उम्र 4 से 5 साल होती है। एक जोंक 40-50 अंडे देती है। इनके प्रजनन का मुफीद समय मार्च और मई होता है।

जोंक थेरेपी के फायदे

  • जोंक थेरेपी से गंजेपन की परेशानी दूर की जा सकती है। इससे सिर का रक्तसंचार बेहतर होता है।
  • जोंक थेरेपी से रक्त संचार बेहतर होने से बाल झड़ने की समस्या से राहत पाई जा सकती है।
  • नसों में जमे खून के थक्के को खत्म कर सकते हैं।
  • जोंक थेरेपी से दाद और एग्जिमा जैसे त्वचा रोग में सहायक होते है।


जोंक थेरेपी से नुकसान

  • जोंक थेरेपी लेने से रक्तस्राव की संभावना
  • शरीर में खून की कमी हो सकती है
  • एलर्जिक होने की संभावना
  • अधिक दर्द हो सकता है
  • खुलजी शुरू हो सकती है
  • बैक्टीरियल संक्रमण होना
  • फफोले जैसा महसूस होना


जोंक की पैदावार के लिए तालाब बनाया गया है। ज्यादा पैदावार होने पर जोंक को बेचा जाएगा। एक और तालाब बनाया जाएगा। जोंक थेरेपी से इलाज शुरू हो चुका है। इसके नतीजे सुखद आ रहे हैं।

-डॉ. मोहम्मद शोएब, जोंक बैंक इंचार्ज, तिब्बिया कॉलेज, एएमयू



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