ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टंगरपाली गांव में एक मां ने अपने ही दो मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी और इसके बाद खुद भी जान देने की कोशिश की।
जानकरी के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान रंजिता ओराम के रूप में हुई है। शनिवार रात का समय था। परिवार ने सामान्य तरीके से खाना खाया और फिर सभी सोने चले गए। आधी रात के करीब रंजिता ने अपने पति को जगाया और किसी बहाने से घर के बाहर भेज दिया। जैसे ही पति बाहर गया, रंजिता ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
इसके बाद, उसने अपनी बेटी जिज्ञाशा ओराम और बेटे विभांशु ओराम पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमला इतना खतरनाक था कि दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बेटा करीब 5 साल का था और बेटी 10 साल की। इस खौफनाक वारदात के बाद रंजिता ने खुद भी अपनी जान लेने की कोशिश की। उसने धारदार हथियार से अपना गला काट लिया।
उधर, बाहर खड़े पति को जब कुछ गड़बड़ी का शक हुआ तो वह पड़ोसियों की मदद से खिड़की तोड़कर घर के अंदर घुसा। अंदर का मंजर देखकर सभी दंग रह गए। दोनों बच्चे खून से लथपथ मृत पड़े थे, जबकि रंजिता गंभीर हालत में पड़ी थी। घटना के तुरंत बाद पति ने रंजिता को झारसुगुड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया। वहां से डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बुर्ला के वीर सुरेंद्र साय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड हॉस्पिटल रेफर कर दिया। फिलहाल, उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और वह इलाजरत है।
पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में घरेलू विवाद को इस घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन असली कारण क्या था, इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। स्थानीय महिला मंजू धनवार ने कहा,”इस घटना के वक्त पड़ोस की महिला दौड़ते हुए हमारे घर आई और हमें बताया कि रंजिता ने दोनों बच्चों को मार दिया है। यह सुनने के बाद हमारे बच्चे पहले स्थिति को देखने आए। हम बाद में आए, जब एम्बुलेंस आई। इस वक्त बच्चों की लाश एम्बुलेंस में डाली जा रही थी।
पूरी घटना के बारे में मृतक बच्चों के पिता को पता है। आधी रात को आरोपी महिला ने अपने पत्नी को किसी बहाने के घर के बाहर चलने को कहा और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। दरवाजा बंद करने के बाद आरोपी महिला ने धारदार हथियार से दोनों बच्चों पर हमला किया और उनकी जान ले ली। बच्चों के गले पर चोट के बहुत गहरे निशान हैं।” पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक टीम की भी मदद ली जा सकती है, ताकि घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।








