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उन्नाव/सोनिक। जिले में तीन औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद प्रदूषण रोकने के ठोस इंतजाम नहीं हैं। हालत ये है कि प्रदूषण पर रोक तो दूर निगरानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कहने को तो जल प्रदूषण रोकने और गंगा नदी में गंदा पानी जाने से रोकने के लिए दो औद्योगिक क्षेत्रों में सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगे हैं लेकिन 200 उद्योगों में केवल 41 टेनरियां ही सीईटीपी से जुड़ी हैं। अन्य से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधित किए ही नदी-नालों के जरिये गंगा में जा रहा है।
उन्नाव शहर के आसपास दही चौकी, मगरवारा और बंथर औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। जबकि स्लॉटर हाउस, फर्टिलाइजर, केमिकल फैक्ट्रियां, टेक्सटाइल मिल, पेंट, पेपर मिल सहित 165 बड़े उद्योग हैं। हैरानी की बात ये है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती के बाद भी जिले की केवल 41 टेनरी ही सीईटीपी से जुड़ी हैं। इसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है।
दोनों सीईटीपी अपग्रेड नहीं
दही चौकी और बंथर औद्योगिक क्षेत्रों में टेनरियों व फैक्ट्रियों के पानी (उत्प्रवाह) को साफ करने के लिए स्थापित सीईटीपी अपग्रेड नहीं है। पुरानी तकनीक होने से सीईटीपी क्रोमियम को पानी से अलग नहीं कर पाते। वहीं सीओडी (केमिकल आक्सीजन डिमांड), पीएचबी, बीओडी और एसएस (सब स्टैंड सॉलिड) की काफी मात्रा पानी के साथ ही बह जाती है।
तकनीकी सहायक आशुतोष टंडन ने बताया कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मानकों के अनुसार अपग्रेड करने के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। सीईटीपी को अपग्रेड करने के लिए 67.68 करोड़ रुपये मंजूर हो गए हैं। अगस्त माह से काम शुरू हो जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। जो भी उपकरण और मॉनीटरिंग सिस्टम आवश्यक होंगे, लगाए जाएंगे। फैक्टरियों और टेनरियों के उत्प्रवाह वाले स्थानों पर कैमरे लगाकर नजर रखी जाएगी। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। सीईटीपी अपग्रेड करने का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। – शशि बिंदकर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
उन्नाव/सोनिक। जिले में तीन औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद प्रदूषण रोकने के ठोस इंतजाम नहीं हैं। हालत ये है कि प्रदूषण पर रोक तो दूर निगरानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कहने को तो जल प्रदूषण रोकने और गंगा नदी में गंदा पानी जाने से रोकने के लिए दो औद्योगिक क्षेत्रों में सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगे हैं लेकिन 200 उद्योगों में केवल 41 टेनरियां ही सीईटीपी से जुड़ी हैं। अन्य से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधित किए ही नदी-नालों के जरिये गंगा में जा रहा है।
उन्नाव शहर के आसपास दही चौकी, मगरवारा और बंथर औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। जबकि स्लॉटर हाउस, फर्टिलाइजर, केमिकल फैक्ट्रियां, टेक्सटाइल मिल, पेंट, पेपर मिल सहित 165 बड़े उद्योग हैं। हैरानी की बात ये है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती के बाद भी जिले की केवल 41 टेनरी ही सीईटीपी से जुड़ी हैं। इसके कारण प्रदूषण बढ़ रहा है।
दोनों सीईटीपी अपग्रेड नहीं
दही चौकी और बंथर औद्योगिक क्षेत्रों में टेनरियों व फैक्ट्रियों के पानी (उत्प्रवाह) को साफ करने के लिए स्थापित सीईटीपी अपग्रेड नहीं है। पुरानी तकनीक होने से सीईटीपी क्रोमियम को पानी से अलग नहीं कर पाते। वहीं सीओडी (केमिकल आक्सीजन डिमांड), पीएचबी, बीओडी और एसएस (सब स्टैंड सॉलिड) की काफी मात्रा पानी के साथ ही बह जाती है।
तकनीकी सहायक आशुतोष टंडन ने बताया कि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मानकों के अनुसार अपग्रेड करने के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। सीईटीपी को अपग्रेड करने के लिए 67.68 करोड़ रुपये मंजूर हो गए हैं। अगस्त माह से काम शुरू हो जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। जो भी उपकरण और मॉनीटरिंग सिस्टम आवश्यक होंगे, लगाए जाएंगे। फैक्टरियों और टेनरियों के उत्प्रवाह वाले स्थानों पर कैमरे लगाकर नजर रखी जाएगी। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। सीईटीपी अपग्रेड करने का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। – शशि बिंदकर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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